ग्वालियर-चंबल अंचल के दतिया जिले के तगा गांव स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर अनियमितता पकड़ी गई है। यहां के उपभोक्ताओं को कई महीनों से राशन नहीं मिलने की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद खाद्य विभाग ने मामले की गहनता से जांच की।

बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर दिखाया गया फर्जी वितरण

विभागीय जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि दुकान के विक्रेता ने 46 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक सत्यापन तो करवा लिया, लेकिन उन्हें मई, जून और जुलाई 2026 का अनाज नहीं दिया गया। केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड पर ही खाद्यान्न का वितरण दर्शाया जाता रहा।

हजारों किलो अनाज और नमक का हुआ गबन

ई-पॉस पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक, जून और जुलाई 2026 के दौरान कुल 8462 किलो गेहूं, 2098 किलो चावल और 496 किलो नमक का वितरण कागजों में दर्ज किया गया था। जब भौतिक सत्यापन किया गया तो यह स्पष्ट हो गया कि यह पूरी सामग्री पात्र उपभोक्ताओं तक कभी पहुंची ही नहीं।

खाद्य विभाग ने इस अनधिकृत वितरण और गबन किए गए खाद्यान्न की कुल कीमत 3 लाख 26 हजार 720 रुपए आंकी है। राशन में गड़बड़ी उजागर होने के बाद प्रशासन ने पहले ही इस दुकान को निलंबित कर दिया था तथा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए उनका जुड़ाव पास की दूसरी दुकान से कर दिया था।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू

विक्रेता द्वारा किए गए इस गबन की पुष्टि होने पर खाद्य विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। विभाग द्वारा जुटाए गए बयानों और ई-पॉस के डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई को आगे बढ़ाया है।

चिरूला थाना पुलिस ने इस मामले में आरोपी विक्रेता नीरज पाल के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस अब इस धोखाधड़ी से जुड़े तमाम दस्तावेजों और अन्य संभावित संलिप्तताओं की गहराई से छानबीन कर रही है।