ग्वालियर-चंबल संभाग के किसानों के खेतों में लंबे समय से खाद के नाम पर घातक रसायन घोला जा रहा था। इस बात का खुलासा तब हुआ जब एक लंबी और जोखिमभरी पड़ताल के जरिए इस पूरे अवैध कारोबार की परतें खुलीं। इस काले कारोबार से जुड़े मुख्य सप्लायर निशांत अग्रवाल ने कैमरे पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे इस बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है।
रुड़की से केमिकल और आगरा की बोरियों का खेल
पड़ताल में सामने आया कि इस फर्जीवाड़े का दायरा कई राज्यों तक फैला हुआ था। रुड़की से केमिकल मंगाया जाता था और आगरा से छपाई वाली बोरियां लाई जाती थीं, जिनकी मदद से डबरा क्षेत्र में नकली खाद की मिक्सिंग का अवैध काम धड़ल्ले से चल रहा था। आरोपी इतने बेखौफ थे कि उनका कहना था कि यदि रास्ते में पुलिस रोके, तो सिर्फ पैसे दिखा देना बाकी सब संभाल लिया जाएगा।
95 हजार की डील और थाने के बाहर हुई गिरफ्तारी
सोमवार की सुबह योजना के मुताबिक एक बड़ा सौदा तय किया गया। टीम ने 100 बैग एनपीके खाद का ऑर्डर देकर आरोपी निशांत को 95 हजार रुपये नकद दिलवाए। रकम हाथ में आते ही उसने गोराघाट स्थित गोदाम से लोडिंग वाहन चालक कल्लू साहू को माल भरकर आलमपुर के लिए रवाना कर दिया। रास्ते में पहले से ही सतर्क भिंड पुलिस ने इस वाहन को अपनी गिरफ्त में ले लिया।
मुख्य आरोपी पुलिस के शिकंजे में
गाड़ी पकड़े जाने के बाद गोराघाट गोदाम से इसके साझीदार रिंकू शर्मा को भी धर दबोचा गया। इसके ठीक बाद, जब मुख्य सरगना निशांत अग्रवाल डीएपी की एक और खेप यानी 100 बोरियों के एवज में 1.70 लाख रुपये एडवांस लेने के लिए डबरा सिटी थाने के बाहर पहुंचा, तो पुलिस ने उसे भी रंगे हाथों दबोच लिया।
भिंड के पुलिस अधीक्षक सूरज वर्मा ने इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि मिली सटीक जानकारियों के आधार पर पुलिस और कृषि विभाग ने साझा कार्रवाई करते हुए लगभग तीन हजार बोरी नकली खाद बरामद की है। इस पूरे नेटवर्क में लिप्त अन्य सहयोगियों की भी तलाश की जा रही है और उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!