गंभीर मरीज को एयरलिफ्ट करने में भारी हीलाहवाली
दतिया में स्वास्थ्य सेवाओं और एयर एम्बुलेंस संचालन की पोल खोलने वाला एक मामला सामने आया है। आईसीयू में भर्ती फेफड़ों के गंभीर रोगी बालकिशन कुशवाहा को दतिया से भोपाल एम्स तक पहुंचाने की प्रक्रिया में 18 घंटे से अधिक का समय बर्बाद हो गया। हैरानी की बात यह है कि सड़क मार्ग से यह दूरी 6 से 8 घंटे में तय की जा सकती थी, लेकिन एयर एम्बुलेंस की व्यवस्थाएं पटरी से उतरी नजर आईं।
पहले दिन अनुमति न मिलने से लौटाना पड़ा वापस
तय कार्यक्रम के मुताबिक बुधवार शाम करीब साढ़े चार बजे हेलीकॉप्टर दतिया एयरपोर्ट पर पहुंचा था। हालांकि, भोपाल एयर ट्रैफिक कंट्रोल से समय पर एनओसी यानी अनुमति न मिलने के कारण मरीज को रनवे पर ही करीब दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। हालात बिगड़ने पर शाम साढ़े छह बजे मजबूरन मरीज को वापस मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाना पड़ा।
दूसरे दिन भी जारी रही मनमानी, होटल में आराम करते मिले पायलट
परेशानी का सिलसिला यही नहीं थमा। अगले दिन गुरुवार सुबह लगभग नौ बजकर दस मिनट पर मरीज को दोबारा एयरपोर्ट लाया गया। इस दौरान हेलीकॉप्टर तो वहां मौजूद था, लेकिन फ्लाईओला कंपनी के पायलट और अन्य स्टाफ सदस्य होटल में आराम फरमाते पाए गए। करीब सवा घंटे के लंबे इंतजार के बाद सुबह दस बजकर इक्कीस मिनट पर मरीज को आखिरकार एयरलिफ्ट किया जा सका।
जिम्मेदार अधिकारियों ने साधी चुप्पी
इस पूरी घटना के संबंध में जब फ्लाईओला कंपनी के कोऑर्डिनेटर से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने नेटवर्क खराब होने का बहाना बनाकर फोन काट दिया। वहीं, इस सेवा की नोडल अधिकारी मोनिका ने भी बार-बार संपर्क किए जाने के बावजूद कॉल रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!