दतिया जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था का एक और मामला सामने आया है। यहां के शंकरगढ़ गांव में नौ महीने की गर्भवती महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस नहीं मिल सकी, जिसके चलते उसका प्रसव घर पर ही कराना पड़ा।
शुक्रवार शाम से शुरू हुई थी प्रसव पीड़ा
प्राप्त जानकारी के अनुसार शंकरगढ़ निवासी राजा आदिवासी की पत्नी सपना नौ माह की गर्भवती थीं। शुक्रवार की शाम को उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। स्थिति को गंभीर देखते हुए परिवारजनों ने तुरंत स्थानीय आशा कार्यकर्ता को इसकी सूचना दी और मदद के लिए बुलाया।
रातभर इंतजार करते रहे परिजन, नहीं आई गाड़ी
आशा कार्यकर्ता ने प्रसूता को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के वास्ते 108 एंबुलेंस सेवा को कई बार फोन किया। सीएचओ डॉ. नितिन कुमार के मुताबिक, शाम के समय लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन हर बार यही आश्वासन मिला कि गाड़ी थोड़ी देर में पहुंच रही है। पूरी रात बीत जाने के बाद भी एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची और महिला प्रसव पीड़ा से जूझती रही।
सुबह आठ बजे घर पहुंची एंबुलेंस
रातभर इंतजार के बाद शनिवार की सुबह महिला का प्रसव घर पर ही हो गया। इसके काफी देर बाद सुबह करीब आठ बजे 108 एंबुलेंस उनके घर पर पहुंची। घटना के बाद मौके पर पहुंचे सीएचओ डॉ. नितिन कुमार ने प्रसूता को बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी, हालांकि परिजनों ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!