डबरा में यातायात की गंभीर होती समस्या और कुप्रबंधन को लेकर स्थानीय अभिभाषक संघ का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। वकीलों ने शहर की बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े शब्दों में ज्ञापन सौंपा है और व्यवस्था में सुधार न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

जाम में फंसने से हुई थी मरीज की मौत

क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से ट्रैफिक का हाल बेहद खराब बना हुआ है। कुछ दिन पहले ही ओवरब्रिज पर लगे भारी जाम में एक हृदय रोगी की कार फंस गई थी, समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीज की कार में ही मौत हो गई थी। इस दर्दनाक घटना के बाद से शहरवासियों और वकीलों में प्रशासन के प्रति भारी नाराजगी है।

इसी गंभीर मुद्दे को लेकर एक दिन पहले भी अभिभाषक संघ द्वारा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन दिया गया था। हालांकि, इसके बावजूद जब धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई, तो वकीलों का गुस्सा और बढ़ गया।

एसडीएम के न मिलने पर नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन

नाराज वकील आज अपनी मांगों को लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे, लेकिन एसडीएम नव किरण कौर के ग्वालियर में किसी मीटिंग में व्यस्त होने के कारण उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद वकीलों ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर अपनी बात प्रशासनिक स्तर पर पहुंचाई।

अभिभाषक संघ ने अपनी मांगों में प्रमुख रूप से ओवरब्रिज के ऊपर लग रहे अघोषित ई-रिक्शा स्टैंड को तत्काल हटाने की बात कही है। इसके अलावा मुख्य मार्ग पर सुबह 6 बजे से रात 12 बजे तक भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने, सड़क किनारे खड़े वाहनों पर कार्रवाई करने और अतिक्रमण करने वाले दुकानदारों पर सख्ती बरतने की मांग की गई है।

पुलिस पर सिर्फ चालान वसूली का आरोप

अभिभाषक संघ के सचिव धर्मेंद्र यादव और योगेश शर्मा ने आरोप लगाया कि डबरा में ट्रैफिक सुधार के नाम पर तैनात टीआई को किसी ने आज तक मैदानी स्तर पर नहीं देखा है। पुलिस का काम केवल दोपहिया वाहनों की चेकिंग कर सिर्फ चालान वसूलना रह गया है, जबकि शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए कोई व्यावहारिक उपाय नहीं किए जा रहे हैं।

अभिभाषक संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार गौतम ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में उचित कदम नहीं उठाए गए, तो अभिभाषक संघ एक बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।