डबरा नगर पालिका परिसर में पिछले कई दिनों से जारी गतिरोध और पार्षदों की भूख हड़ताल आखिरकार तीसरे दिन समाप्त हो गई। ग्वालियर से मौके पर पहुंची जिला परियोजना अधिकारी (शहरी विकास अभिकरण/DUDA) की मध्यस्थता के बाद आंदोलनरत पार्षदों ने अपना अनशन वापस ले लिया।

क्यों ठप पड़े थे शहर के विकास कार्य

नगर पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी देवी राजा और उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे के बीच आपसी खींचतान चल रही थी। इस आंतरिक गतिरोध के कारण डबरा शहर के तमाम विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े थे और जनता से जुड़ी परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही थीं।

इस लेटलतीफी से नाराज होकर पार्षदों ने नगर पालिका के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था, जो बाद में भूख हड़ताल में बदल गया। वार्ड 8 के पार्षद सुमित साहू और वार्ड 16 की पार्षद सुनीता राजोरिया के पति महाराज सिंह राजोरिया ने अनशन का रुख किया था।

अपर कलेक्टर के आश्वासन पर टूटा अनशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर एवं जिला परियोजना अधिकारी भूमिजा सक्सेना डबरा पहुंचीं। उन्होंने दोनों पक्षों की समस्याएं सुनीं और रुकी हुई विकास फाइलों पर हस्ताक्षर कराए। साथ ही 7 सितंबर को नया सम्मेलन बुलाने और समितियों के गठन संबंधी पुराने निर्णयों को लागू करने की बात कही।

पार्षदों ने पहले सिर्फ मौखिक बातों पर ऐतराज जताया और लिखित आश्वासन की मांग रखी। इसके बाद सीएमओ साक्षी बाजपेई और अपर कलेक्टर ने 15 से 20 दिन के भीतर ज़मीन पर काम दिखने का लिखित भरोसा दिया, जिसके बाद उपाध्यक्ष सत्येंद्र दुबे और अन्य पार्षदों ने आंदोलनकारियों को नींबू पानी पिलाकर अनशन खत्म कराया।

आगे की चेतावनी और प्रशासन का रुख

इस दौरान पार्षदों ने अमृत योजना के तहत जलापूर्ति कर रही बांको कंपनी के भुगतान में गड़बड़ी की शिकायत भी दर्ज कराई, जिसपर जांच का भरोसा मिला है। अनशनकारियों का साफ कहना है कि यदि इस बार भी सिर्फ आश्वासन मिला और धरातल पर काम नहीं दिखा, तो वे दोबारा उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

प्रशासन की तरफ से अपर कलेक्टर भूमिजा सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि इस बार सिर्फ कोरा आश्वासन नहीं दिया गया है, बल्कि सभी विकास कार्यों को प्राथमिकता से अमलीजामा पहनाया जाएगा। सीएमओ को भी कार्यों में तेजी लाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।