अस्सी करोड़ के प्रोजेक्ट में ठेकेदार की मनमानी

डबरा शहर में प्रथम चरण के तहत अस्सी करोड़ रुपए से अधिक की लागत से सीवर प्रोजेक्ट का कार्य किया जा रहा है। कायदों के अनुसार पाइपलाइन डालने के तुरंत बाद ठेकेदार एजेंसी के लिए सड़क की मरम्मत कर उसे वाहनों के चलने योग्य बनाना अनिवार्य होता है। परंतु, खुदाई के पंद्रह दिन बीत जाने के बाद भी सड़कों को ऐसे ही छोड़ दिया गया है।

सड़कों पर पसरा मलबा और दलदल

जलावर्धन योजना के दर्द से जूझ चुके शहरवासियों के लिए अब सीवर की खुदाई बड़ी मुसीबत बन गई है। खुदाई के बाद निकला मलबा और मिट्टी सड़कों पर ही बिखरी हुई है, जिससे थोड़ी सी नमी या बारिश होने पर पूरा इलाका दलदल में बदल जाता है। हालात इतने बदतर हैं कि लोगों के वाहन घरों के बाहर ही खड़े रह जाते हैं और आवागमन पूरी तरह बाधित है।

रास्तों के इस प्रकार बदहाल होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में और अधिक दिक्कतें आ रही हैं। बीमार व्यक्तियों को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए परिजनों को उन्हें गोद में उठाकर मुख्य मार्ग तक लाना पड़ रहा है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए इन रास्तों से निकलना किसी खतरे से कम नहीं है।

पूर्व में लग चुकी है सतरह लाख की पेनल्टी

नियमों की अनदेखी करने पर नगर पालिका द्वारा पहले भी सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। कार्य में लापरवाही बरतने के कारण मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा ठेकेदार पर सत्रह लाख रुपए से अधिक की भारी-भरकम पेनल्टी लगाई जा चुकी है। इसके बावजूद ठेकेदार के रवैये में कोई सुधार देखने को नहीं मिला है।