डबरा क्षेत्र के नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत भरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से लाई गई नई व्यवस्था के तहत अब पीएफ खाते से पैसे निकालने की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सरल हो गई है। आवेदन करने से पहले ही कर्मचारियों को इस बात की पूरी जानकारी मिल जाएगी कि वे अपने खाते से कितनी राशि निकाल सकते हैं।

तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटे गए निकासी के नियम

नए पोर्टल पर जैसे ही कोई कर्मचारी आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा, सिस्टम उसकी पात्रता और जरूरत के मुताबिक उपलब्ध धनराशि खुद-ब-खुद प्रदर्शित कर देगा। इसके साथ ही यह भी साफ हो जाएगा कि संबंधित श्रेणी के तहत कितनी बार पैसे निकाले जा सकते हैं। सुविधा के लिए आंशिक निकासी के पुराने और जटिल नियमों को अब तीन स्पष्ट श्रेणियों में समेकित कर दिया गया है, जिससे कर्मचारियों को अलग-अलग प्रावधानों को खोजने में परेशानी नहीं होगी।

आवश्यक सामाजिक सुरक्षा और आवास संबंधी जरूरतें

पहली श्रेणी 'एसेंशियल सोशल सिक्योरिटी नीड्स' है, जिसके अंतर्गत बीमारी, बच्चों की शिक्षा और विवाह जैसे आयोजनों के लिए पीएफ फंड से राशि निकाली जा सकती है। इसके लिए 12 महीने की कुल सेवा पूरी होने पर पात्र सदस्य अपने योग्य बैलेंस का शत-प्रतिशत हिस्सा निकाल सकते हैं। वहीं, दूसरी श्रेणी 'हाउसिंग रिलेटेड नीड्स' है, जिसमें मकान या फ्लैट की खरीद, प्लॉट का निर्माण, होम लोन का भुगतान और घर की मरम्मत शामिल हैं। इस श्रेणी में भी 12 महीने की नौकरी पूरी होने पर 100 प्रतिशत तक राशि निकालने का प्रावधान तय किया गया है।

विशेष परिस्थितियों के लिए भी रहेगा विशेष विकल्प

ईपीएफओ की इस नई डिजिटल व्यवस्था में कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं, जिसे 'स्पेशल सिचुएशंस' नाम की तीसरी श्रेणी में रखा गया है। इसके जरिए बिना कोई विशेष कारण बताए भी पीएफ राशि निकाली जा सकती है। इसके लिए भी 12 महीने की सेवा अवधि पूरी होना अनिवार्य शर्त रखी गई है, जिसके बाद सदस्य अपने पात्र बैलेंस का पूरा हिस्सा निकाल सकेंगे। हालांकि इस श्रेणी के तहत एक वित्त वर्ष में अधिकतम दो बार ही पीएफ निकालने की अनुमति होगी।