डबरा और टेकनपुर अंचल में बारिश का दौर थमने के बाद अब खेतों में धान की फसल के लिए यूरिया खाद की मांग में तेजी आ गई है। इस बीच खाद वितरण के लिए बनाई गई ई-टोकन व्यवस्था अन्नदाताओं के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। पिछले चार-पांच दिनों से पोर्टल पर स्थानीय स्तर के शासकीय गोदाम और अधिकृत खाद दुकानों के विकल्प नजर नहीं आ रहे हैं।

पोर्टल पर स्थानीय केंद्रों के बजाय दूसरे जिलों के नाम

किसानों का कहना है कि ई-टोकन जनरेट करने के लिए जब वे पोर्टल खोलते हैं, तो वहां डबरा या टेकनपुर के बजाय ग्वालियर, इंदरगढ़ और दतिया की दुकानों के नाम प्रदर्शित हो रहे हैं। इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण स्थानीय किसान असमंजस में हैं कि वे खाद प्राप्त करने के लिए आखिर किस केंद्र पर जाएं।

धान की फसल के लिए जरूरी है यूरिया का छिड़काव

क्षेत्र के किसानों के अनुसार इस समय धान की फसल ऐसे महत्वपूर्ण पड़ाव पर है, जहां यूरिया का छिड़काव करना बेहद आवश्यक है। यदि खेतों को समय पर खाद नहीं मिल पाई, तो इसका सीधा असर फसल की कुल पैदावार पर पड़ेगा। पोर्टल पर टोकन नहीं मिलने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।

कालाबाजारी और महंगे दाम पर बेचने के आरोप

तकनीकी समस्याओं के अलावा किसानों ने क्षेत्र में खाद की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ दुकानदार उनकी मजबूरी का गलत फायदा उठा रहे हैं और यूरिया को कथित तौर पर 350 से 400 रुपए प्रति बोरी तक के ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है।

अन्नदाताओं ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से मांग की है कि ई-टोकन पोर्टल की इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए। साथ ही, क्षेत्र में यूरिया की आपूर्ति, उसकी निर्धारित दरों पर बिक्री और कथित कालाबाजारी की उच्च स्तरीय जांच हो ताकि किसानों को राहत मिल सके।

खाद वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है और ई-टोकन जारी हो रहे हैं। यदि सर्वर की समस्या के कारण किसी किसान को परेशानी आ रही है, तो वह सीधे कृषि विभाग से संपर्क कर सकता है। उसकी समस्या का तत्काल समाधान कराया जाएगा। - भानुप्रताप घुरैया, एसडीओ, कृषि विभाग, डबरा