डबरा स्थित 'अपना घर आश्रम' में रविवार को एक ऐसा हृदयस्पर्शी दृश्य सामने आया जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। मंडला जिले के केकरवाड़ा निवासी लल्ला, जिन्हें आश्रम में सतीश के नाम से जाना जा रहा था, पूरे बीस साल बाद अपने परिवार से सकुशल मिल गए।
बीस साल पहले घर से भटक गए थे लल्ला
करीब दो दशक पूर्व मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण लल्ला अचानक अपने घर से बिना बताए कहीं चले गए थे। उनके परिवारजनों ने उन्हें तलाशने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। समय बीतता गया और अपनों की वापसी की उम्मीदें कमजोर होती गईं।
दतिया पुलिस की कार्रवाई से सामने आया सुराग
हाल ही में दतिया पुलिस ने एक अभियान के दौरान 12 बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया था, जिसमें लल्ला भी शामिल थे। इसके बाद प्रशासनिक स्तर पर उन्हें बेहतर देखभाल के लिए डबरा के 'अपना घर आश्रम' में भेज दिया गया। आश्रम में लगातार उनके स्वास्थ्य पर ध्यान दिया गया और काउंसलिंग की गई।
इलाज के बाद जब लल्ला की मानसिक स्थिति में सुधार हुआ, तो उन्होंने अपने गृह क्षेत्र के बारे में जानकारी दी। आश्रम प्रबंधन ने इंटरनेट और गूगल की मदद से मंडला के केकरवाड़ा गांव का पता ढूंढ निकाला।
फोन पर बातचीत के बाद डबरा पहुंचे परिजन
शनिवार की रात को ही आश्रम प्रबंधन ने लल्ला की बात उनके परिवार से फोन पर कराई। वर्षों बाद घर के मुखिया की आवाज सुनकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और वे तुरंत रविवार की सुबह डबरा आश्रम पहुंच गए।
सांसारिक भागदौड़ के बीच अपनों का यह मिलन गवाह बना मानवीय संवेदनाओं का, जहां एसपी मयूर खंडेलवाल, आश्रम संस्थापक मनीष पाण्डेय और प्रमोद भगत की मौजूदगी में सभी की आंखें नम हो गईं।
इस अवसर पर दतिया पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने अपने हाथों से लल्ला और उनके परिजनों को लड्डू खिलाकर इस पल को खास बनाया। आपको बता दें कि वर्ष 2017 से शुरू हुए इस आश्रम में अब तक एक हजार से ज्यादा बेसहारा और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों का रेस्क्यू कर उनका उपचार किया जा चुका है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!