डबरा नगर पालिका में महिला जनप्रतिनिधियों को केवल औपचारिक बैठकों तक ही सीमित कर दिया गया है। प्रशासनिक नियमों और महिला सशक्तिकरण की मंशा को ताक पर रखकर यहां वार्डों में पति-पुत्र राज और बिचौलियों का खुला बोलबाला देखने को मिल रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर फाइलें देख रहे थे पार्षद पुत्र
हाल ही में सामने आई एक पड़ताल में निकाय के भीतर शासकीय प्रोटोकॉल और प्रशासनिक मर्यादा की सरेआम धज्जियां उड़ती पाई गईं। वार्ड क्रमांक 5 की पार्षद नारायणी मौर्य के पुत्र दिनेश मौर्य प्रेसिडेंट इन काउंसिल (PIC) मेंबर के लिए आरक्षित चेंबर की मुख्य कुर्सी पर बैठकर शासकीय फाइलों का अवलोकन करते हुए रंगे हाथों देखे गए।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि नगर पालिका के जिम्मेदार इंजीनियर उनके बगल की कुर्सी पर बिल्कुल मूकदर्शक बनकर बैठे हुए थे। इसके ठीक बाद पार्षद पुत्र स्वच्छता विभाग के चेंबर में पहुंचे और वहां भी कार्यालयीन बाबू की कुर्सी पर बैठकर अपना रौब झाड़ते नजर आए।
ठेकेदारों का भी दफ्तरों की मुख्य कुर्सियों पर अवैध कब्जा
शासकीय दफ्तरों में अनधिकृत दखल और कब्जे का यह खेल केवल जनप्रतिनिधियों के परिजनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नगर पालिका में काम करने वाले ठेकेदार भी कायदे-कानूनों को पूरी तरह ठेंगा दिखा रहे हैं। निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदार राजन सिंह उर्फ रजनू चौहान लोक निर्माण विभाग के चेंबर में बाबू की मुख्य कुर्सी पर आराम से बैठकर फोन चलाते दिखाई दिए।
शासकीय आदेशों और नियमों का खुला उल्लंघन
राज्य शासन के नगरीय विकास विभाग के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि निकायों की बैठकों, दफ्तरों और शासकीय कार्यों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पति, पुत्र या अन्य परिजनों का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसे में किसी अनधिकृत व्यक्ति का कुर्सी पर बैठना शासकीय आदेशों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
मध्य प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 41 के तहत अपने संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए किसी गैर-प्राधिकृत व्यक्ति को प्रशासनिक कार्यों में दखल देने देना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। इस प्रावधान के आधार पर राज्य सरकार संबंधित पार्षद की सदस्यता तक रद्द करने का अधिकार रखती है।
किसी भी बाहरी ठेकेदार या अनधिकृत व्यक्ति को शासकीय फाइलें दिखाना या कार्यालय की गोपनीयता भंग करना शासकीय सेवा नियमों के तहत एक गंभीर अपराध है। इसके दायरे में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान तय किया गया है।
सीएमओ ने दिए मामले की जांच कर कार्रवाई के निर्देश
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए डबरा नगर पालिका की सीएमओ साक्षी वाजपेयी ने कहा है कि किसी भी जनप्रतिनिधि के पुत्र या पति का निकाय के भीतर अधिकारी एवं कर्मचारी की कुर्सी पर बैठना पूरी तरह अवैधानिक है। उन्होंने मीडिया द्वारा मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद इसकी उच्च स्तर पर जांच करवाकर सख्त कार्रवाई करने की बात कही है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!