नगर पालिका हंगामे के बाद डबरा थाने पर प्रदर्शन

डबरा नगर पालिका के सामने चल रहे धरने के दौरान हुए विवाद और नौ लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा का मामला दर्ज किए जाने के बाद तनाव की स्थिति बन गई है। इसी सिलसिले में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा लगभग दो सौ समर्थकों के साथ डबरा सिटी थाने का घेराव करने पहुंचे।

छावनी में बदला थाना परिसर, रोके गए प्रदर्शनकारी

घेराव की आशंका को भांपते हुए पुलिस प्रशासन पहले से ही पूरी तरह सतर्क था। डबरा सिटी थाने को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था और सुरक्षा के मद्देनजर थाने के दोनों मुख्य द्वार बंद कर दिए गए थे। डबरा तथा भितरवार के एसडीओपी समेत करीब आधा दर्जन थानों के प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ थाने के बाहर मुस्तैद रहे और उन्होंने भीड़ को गेट पर ही रोक लिया।

क्या है पूरा विवाद और एफआईआर की वजह

डबरा संघर्ष विकास संघर्ष समिति के बैनर तले नगर पालिका परिसर में क्षेत्र के विकास न होने का आरोप लगाते हुए धरना दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों में शामिल रूपेश कैन के अनुसार, बीते दिन पीआईसी की बैठक के दौरान तीन युवकों द्वारा नगर पालिका के गेट पर ताला लगाने और बैठक बाधित करने का आरोप लगा था।

इस घटना से नाराज होकर नगर पालिका अध्यक्ष, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ), पार्षदों और कर्मचारियों ने डबरा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। सुनवाई में देरी के चलते नगर पालिका का अमला करीब पांच घंटे तक धरने पर बैठा रहा, जिसके बाद शाम करीब सात बजे नौ लोगों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।

पुलिस अधिकारियों ने लिया ज्ञापन, निष्पक्ष जांच का आश्वासन

थाने का घेराव करने पहुंचे लोगों ने दर्ज किए गए मुकदमों को झूठा और निराधार बताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि ताला लगाने जैसा कोई कृत्य उनके द्वारा नहीं किया गया है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मौके पर मौजूद एसडीओपी सौरभ कुमार ने प्रदर्शनकारियों की बात सुनी और उनका ज्ञापन लिया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीएमओ की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है और आंदोलनकारियों के आवेदन को जांच में शामिल कर लिया गया है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियम अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।