डबरा में थाने के सामने प्रदर्शन और नारेबाजी

नगर पालिका कार्यालय के मुख्य द्वारों पर ताला जड़े जाने के बाद दर्ज की गई एफआईआर को लेकर उपजा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बुधवार को डबरा विकास संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए रैली निकाली और सिटी थाने का घेराव किया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक के नाम संबोधित एक ज्ञापन एसडीओपी को सौंपा गया, जिसमें हाल ही में दर्ज की गई एफआईआर को पूरी तरह से झूठा करार देते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने की मांग रखी गई।

मंगलवार को नपा कार्यालय पर जड़े गए थे ताले

यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार को शुरू हुआ था जब नगर पालिका में पीआईसी की बैठक प्रस्तावित थी। बैठक शुरू होने से ठीक पहले खुद को गोसेवक बताने वाले कुछ युवकों ने कार्यालय के मुख्य द्वारों पर ताले लगा दिए थे, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया था।

शुरुआत में यह मामला सड़क हादसों में हो रही गोवंश की मौतों की गंभीर समस्या को लेकर उठा था। ताला लगाने वाले युवकों ने भी अपनी पहचान गोसेवक के रूप में दी थी, लेकिन पुलिस कार्रवाई के बाद मामला तूल पकड़ गया।

गोवंश के मुद्दे से हटकर धरने तक सिमटा घटनाक्रम

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि गोवंश की रक्षा और उनकी समस्याओं से शुरू हुआ यह आंदोलन अंततः नगर पालिका कार्यालय के सामने केवल धरने और विरोध प्रदर्शन के मुद्दे तक ही सिमट कर रह गया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान न तो गोवंश की सुरक्षा से जुड़े मूल मुद्दों पर कोई ठोस चर्चा हुई और न ही ताले लगाने वाले युवकों के समर्थन में कोई अन्य औपचारिक गोसेवक संगठन सामने आया। फिलहाल समिति के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से मामले में दोबारा निष्पक्ष कार्रवाई करने की अपनी मांग पर अड़े रहने की बात कही है।