भिंड जिले से ताल्लुक रखने वाले और शहडोल संभाग के पूर्व कमिश्नर राजीव शर्मा को जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में ‘जल प्रहरी सम्मान’ से नवाजा गया है। यह कार्यक्रम विश्व युवक केंद्र परिसर में आयोजित किया गया था।

कई दिग्गज हस्तियों ने की सराहना

इस गरिमामयी समारोह में प्रख्यात जलपुरुष राजेंद्र सिंह, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल आर्य और जैन मुनि लोकेश मुनि महाराज सहित कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे। वक्ताओं ने पानी की हर एक बूंद बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया और राजीव शर्मा के प्रयासों की सराहना की।

दमोह से शुरू हुआ था जल बचाने का सफर

राजीव शर्मा ने अपने प्रशासनिक सेवाकाल के दौरान वर्ष 1991 में दमोह जिले के राजनगर तालाब के गहरीकरण के साथ जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाए थे। लगभग सौ एकड़ में फैले इस जलाशय का जीर्णोद्धार उनके शुरुआती और महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल रहा है।

इसके बाद उन्होंने नरसिंहपुर में सींगरी नदी को नया जीवन देने और शाजापुर क्षेत्र में जल स्रोतों को संवारने का कार्य किया। वर्ष 2000 में मंदसौर के गरोठ क्षेत्र में उन्होंने भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा दिया, जिसके तहत हजारों की संख्या में कुओं और नलकूपों के माध्यम से भूजल स्तर को सुधारने का अभियान चलाया गया।

एक हजार से अधिक गांवों में चला जलाभिषेक अभियान

उनके मार्गदर्शन में चलाए गए जलाभिषेक अभियान का दायरा करीब ग्यारह सौ गांवों तक फैला। इस मुहिम के दौरान लगभग छह सौ स्टॉप डैम और बोरी बंधान जैसी जल संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिससे बारिश के पानी को रोकने में मदद मिली और बाद में साल 2005 में इस मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया गया।

वर्ष 2004 से 2011 के बीच मंडला, बालाघाट और उमरिया जिलों में भी रोजगार गारंटी योजना के जरिए जल संरचनाएं विकसित की गईं। वहीं, साल 2023 में शहडोल संभाग में जल क्रांति अभियान के तहत किसानों को अपने ट्यूबवेल और कुओं में वर्षा जल उतारने के लिए प्रेरित किया गया।

अपने पैतृक गांव गढ़ी जौरी में भी उन्होंने युवाओं को साथ लेकर तालाब की सफाई करवाई। इसके अलावा भिंड क्षेत्र के लगभग तीस गांवों में स्थानीय नागरिकों को जल संचयन और भूजल बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों के प्रति जागरूक करने का काम किया गया है।