गोहद में विश्राम घाट का जीर्णोद्धार बना जी का जंजाल
भिंड जिले के गोहद नगर में नागरिकों की सुविधा के लिए कराए जा रहे विश्राम घाट के जीर्णोद्धार का कार्य अब आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गया है। गायत्री मंदिर के समीप बैसली नदी के तट पर स्थित इस प्राचीन विश्राम घाट पर करीब 15 फीट ऊंची दीवार का निर्माण कर दिया गया है। इस स्थिति के कारण घाट परिसर से सीधे नदी के जलस्तर तक पहुंचने का कोई मार्ग नहीं बचा है।
सीढ़ियां न होने से पितृ पक्ष में रुकी परंपरा
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि इससे पहले विश्राम घाट के पास नदी तक उतरने के लिए पक्की सीढ़ियां बनी हुई थीं, जिनकी मदद से लोग आसानी से जलस्त्रोत तक पहुंचकर स्नान, पूजन और तर्पण के अनुष्ठान संपन्न करते थे। हालिया सुंदरीकरण और निर्माण कार्य के दौरान वहां चबूतरा तो बना दिया गया, किंतु नदी तक उतरने के मार्ग को पूरी तरह अनदेखा कर दिया गया। रास्ते के अभाव में विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
श्रद्धालुओं को दूसरी तरफ जाने की मजबूरी
मौजूदा समय में पितृ पक्ष चलने के कारण गोहद शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करने विश्राम घाट पहुंच रहे हैं। घाट से नदी तक सीधी पहुंच न होने के कारण इन श्रद्धालुओं को मजबूरन नदी के दूसरे तट की ओर रुख करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि घाट पर जल्द से जल्द सीढ़ियों का निर्माण कराया जाए।
नगर पालिका सीएमओ का बयान और गुणवत्ता पर सवाल
इस पूरे मामले पर गोहद के सीएमओ सोनू परिहार ने स्पष्ट किया है कि बैसली नदी के विश्राम घाट का जीर्णोद्धार कार्य प्रगति पर है तथा स्थानीय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नदी तक उतरने के लिए आगे और सीढ़ियों का निर्माण कराया जाएगा। दूसरी ओर, नागरिकों ने इस निर्माण कार्य की क्वालिटी पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि मौके पर हो रहा काम तय मानकों के मुताबिक नहीं है, जिसकी शिकायत सीएमओ और एसडीएम को पंचनामा सौंपकर की जा चुकी है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!