लहार एसडीएम पर महिला पटवारी से अभद्रता का आरोप

भिंड जिले के लहार क्षेत्र में प्रशासनिक कामकाज के दौरान विवाद की स्थिति बन गई है। लहार एसडीएम महेंद्र सौजन्या पर एक महिला पटवारी के साथ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना के सामने आने के बाद से राजस्व अमले और पटवारियों में रोष व्याप्त है, जिसके चलते पटवारी संघ ने खुलकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुना है।

जिला पटवारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यह घटना 8 सितंबर की शाम को हुई थी। तय कार्यक्रम के तहत सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की समीक्षा की जानी थी। इसके लिए लहार एसडीएम ने वाट्सऐप संदेश और कार्यालयीन ऑपरेटर के जरिए फोन करवाकर पटवारियों को अपने कक्ष में बुलाया था, जहां पहुंचने पर कथित तौर पर उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया।

बैठक के दौरान कहे गए आपत्तिजनक शब्द

संघ के जिला अध्यक्ष विनायक सिंह तोमर और जिला सचिव सौरभ भदौरिया द्वारा दिए गए ज्ञापन में बताया गया है कि 8 सितंबर को शाम करीब 7 बजे जब पटवारी एसडीएम कक्ष में पहुंचे, तो वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि अधिकारियों की ओर से ‘कौन है’, ‘किसने बुलाया है’, ‘यहां क्यों आए हैं’ और ‘ये कोई सार्वजनिक जगह है जो मुंह उठाकर चले आए’ जैसी बातें कहीं गईं।

मामला तब और गंभीर हो गया जब एक महिला पटवारी के बैठने को लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। संघ का आरोप है कि महिला पटवारी से यह कहा गया कि वह वहां क्या एसडीएम की शक्ल देखने आई है और किससे पूछकर बैठी है। साथ ही उन्हें यह भी निर्देश दिया गया कि जब तक बैठने के लिए न कहा जाए, तब तक वे खड़ी रहें।

कलेक्ट्रेट पहुंचकर की गई निष्पक्ष जांच की मांग

इस घटना से आहत पटवारी संघ ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके लिए घटना के समय मौके पर मौजूद अन्य पटवारियों, नायब तहसीलदार और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जाने की बात भी कही गई है।

इसके साथ ही पटवारी संघ ने एसडीएम के कार्यक्षेत्र में पूर्व में पटवारियों के खिलाफ की गई दंडात्मक कार्रवाइयों जैसे वेतन कटौती, वेतन रोकने और निलंबन के मामलों की भी समीक्षा की मांग उठाई है। संघ का कहना है कि यह जांच भी होनी चाहिए कि इन मामलों में कर्मचारियों को नियमानुसार नोटिस और सुनवाई का अवसर मिला था या नहीं।

पीएम किसान शिकायतों और कार्यप्रणाली पर सवाल

प्रदर्शन के दौरान पटवारी संघ ने पीएम किसान योजना से जुड़ी सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के प्रबंधन पर भी सवाल उठाए। संघ का कहना है कि पोर्टल पर वास्तविक स्थिति बदलने या आवेदन में संशोधन करने जैसी तकनीकी सुविधाएं सीधे तौर पर पटवारी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती हैं, इसलिए ऐसे मामलों के लिए कर्मचारियों को बेवजह जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।

संघ ने अंत में कलेक्टर से आग्रह किया है कि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता के साथ-साथ शासकीय कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए। पटवारियों को भयमुक्त और सम्मानजनक माहौल में काम करने का अवसर मिलना चाहिए, हालांकि संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वे प्रशासनिक अनुशासन के विरोधी नहीं हैं।