भिण्ड शहर के पुराने रेलवे स्टेशन क्षेत्र में मंगलवार दोपहर रेलवे विभाग का अमला बुलडोजर और जेसीबी मशीनें लेकर अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंचा। इस दौरान करीब 16 बीघा भूमि पर कार्रवाई करते हुए रेलवे प्रशासन ने लगभग 7 से 8 स्थानों पर बने अस्थायी कब्जों को हटा दिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी गहमागहमी का माहौल बना रहा।

दस्तावेज दिखाने पर अड़े व्यापारी, अधिकारियों से हुई नोकझोंक

कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद कारोबारियों ने अपने पुराने कागजात दिखाते हुए जमीन पर खुद का मालिकाना हक होने का दावा किया। व्यापारियों का कहना था कि वे इस जगह पर लंबे समय से व्यापार करते आ रहे हैं और बिना उनके दस्तावेजों की ठीक से जांच किए बिना इस तरह अचानक कार्रवाई करना पूरी तरह गलत है। हालांकि, मौके पर मौजूद रेलवे अधिकारियों ने उन कागजों को वैध मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों में करीब दो घंटे तक तीखी बहस होती रही।

पुलिस और प्रशासनिक अमले ने संभाली व्यवस्था

बढ़ते हुए विवाद और तनाव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन तथा स्थानीय पुलिस बल को तुरंत मौके पर बुलाया गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मोर्चा संभालते हुए दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की और करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम रखे गए। विरोध के बावजूद रेलवे अमले ने अपने तय प्लान के अनुसार अस्थायी निर्माणों को गिराने का काम जारी रखा।

ई-नीलामी के जरिए लीज पर देने की है योजना

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुराने रेलवे स्टेशन परिसर की इस बेशकीमती जमीन को पूरी तरह सुरक्षित करने के बाद इसे ई-नीलामी प्रक्रिया के जरिए लीज पर देने की योजना है। इसी उद्देश्य के तहत जमीन का सीमांकन कर वहां किए गए अतिक्रमणों को हटाने का अभियान शुरू किया गया है ताकि आगे की व्यावसायिक प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सके।

सतीश शिवहरे नामक स्थानीय व्यापारी का कहना है कि इस जमीन पर उनके परिवार का कब्जा करीब एक सदी यानी 100 साल से चला आ रहा है। उनके मुताबिक यह उनके दादा के समय की पैतृक जगह है और रेलवे के रिकॉर्ड में किसी गलती के कारण नाम दर्ज हुआ है, जिस पर न्यायालय में मामला भी विचाराधीन है। उन्होंने दोटूक कहा कि वे अपनी इस जमीन पर किसी भी कीमत पर जबरन कार्रवाई नहीं होने देंगे।