भिंड जिले के शासकीय संभागीय आईटीआई संस्थान में प्राचार्य और कर्मचारियों के बीच चल रहा आपसी गतिरोध अब सड़क पर आ गया है। प्रशिक्षण अधिकारी मुकेश कटारे के निलंबन से नाराज बड़ी संख्या में संस्थान का स्टाफ मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचा और जोरदार प्रदर्शन किया।

प्राचार्य पर एकपक्षीय कार्रवाई और मनमानी के आरोप

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें स्पष्ट कहा गया कि प्रशिक्षण अधिकारी पर की गई निलंबन की कार्रवाई पूरी तरह से एकपक्षीय है। स्टाफ ने प्राचार्य पुष्कर बंसल पर मनमाने तरीके से काम करने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के गंभीर आरोप लगाए।

5 अक्टूबर की घटना से गरमाया मामला

कर्मचारियों के अनुसार, यह पूरा विवाद 5 अक्टूबर को दोपहर करीब पौने दो बजे हुई एक बैठक के दौरान शुरू हुआ। बैठक में क्लास संचालन और मेहमान प्रवक्ता द्वारा सामान ले जाने के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी। आरोप है कि इसी दौरान प्राचार्य ने मुकेश कटारे के साथ अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया और उनकी गोपनीय चरित्रावली को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

स्टाफ का कहना है कि घटना के समय पंकज शर्मा, उपेंद्र शर्मा, देवेंद्र भदौरिया, मुकेश कुमार, प्रवीण राजौरिया और हरबीर सिंह पारा मौके पर मौजूद थे। कटारे ने उसी दिन इसकी लिखित शिकायत भी दर्ज कराई थी, लेकिन बिना किसी प्रत्यक्षदर्शी के बयान लिए और बिना निष्पक्ष जांच के प्राचार्य के प्रतिवेदन पर निलंबन आदेश थमा दिया गया।

कर्मचारियों से निजी काम कराने और धमकाने का दावा

दिए गए ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि संस्थान में कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है और उनके साथ अपमानजनक बर्ताव किया जाता है। स्टाफ ने आरोप लगाया कि एक कर्मचारी को बैठक के दौरान सभी के सामने बाहर खड़ा रखा गया। इसके अलावा, लिपिकीय और निजी काम कराने के साथ-साथ महिला कर्मचारियों के प्रति भी अनुचित व्यवहार किए जाने की शिकायत सामने आई है।

स्टाफ ने बिना लिखित सूचना के बैठकें बुलाने का भी जिक्र किया। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि कलेक्टर और संचालनालय स्तर की बैठकों या वीडियो कॉन्फ्रेंस में प्राचार्य खुद शामिल नहीं होते और अपनी जिम्मेदारी प्रशिक्षण अधिकारियों पर थोप देते हैं।

निलंबन रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग

जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने मांग की है कि मुकेश कटारे का निलंबन तुरंत प्रभाव से निरस्त किया जाए और उन्हें मूल पद पर बहाल किया जाए। साथ ही 5 अक्टूबर की घटना की स्वतंत्र जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने और सभी गवाहों के बयान दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।