अंचल में पितृपक्ष का दौर शुरू होने के साथ ही लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करने के वास्ते स्थानीय घाटों का रुख कर रहे हैं। हालांकि भिंड के गोहद क्षेत्र में बैसली नदी के तट पर स्थित मुख्य घाट पर व्यवस्थाओं के अभाव के चलते श्रद्धालुओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

टूटी सीढ़ियों और कचरे से जूझ रहे हैं लोग

पवित्र अनुष्ठानों के इस समय में भी बैसल नदी के इस प्रमुख घाट पर साफ-सफाई का कोई पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आ रहा है। आसपास के ग्रामीण और शहरी इलाकों से बड़ी संख्या में नागरिक यहां अपने पितरों को याद करने पहुंच रहे हैं, जिन्हें गंदगी के बीच ही अपने धार्मिक कर्मकांड पूरे करने पड़ रहे हैं।

स्थिति यह है कि नदी तक उतरने के लिए बनी घाट की सीढ़ियां कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इन टूटी और जर्जर सीढ़ियों से नीचे उतरना श्रद्धालुओं, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है।

शराब की बोतलों के कांच बिखरे होने से बढ़ा चोट का खतरा

घाट परिसर में असामाजिक तत्वों के कारण फैली गंदगी और शराब की टूटी हुई बोतलों के कांच के टुकड़े चारों ओर बिखरे पड़े हैं। ऐसे में नंगे पैर अनुष्ठान करने वाले लोगों और वहां बैठने वाले श्रद्धालुओं के पैरों में चोट लगने का गंभीर खतरा हर समय बना रहता है।

प्रशासन से तत्काल सफाई और मरम्मत की मांग

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पितृपक्ष के पावन पखवाड़े की शुरुआत से पहले ही संबंधित विभागों को इस घाट की साफ-सफाई और जीर्ण-शीर्ण सीढ़ियों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन से पुरजोर मांग उठाई है कि बैसली नदी घाट पर तत्काल प्रभाव से सफाई अभियान चलाया जाए, कांच के टुकड़े हटाए जाएं तथा टूटी हुई सीढ़ियों को दुरुस्त किया जाए ताकि तर्पण करने आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।