भिंड जिले के ग्रामीण अंचलों में लंपी वायरस का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है, जिसके चलते गोवंश के स्वास्थ्य को लेकर संकट पैदा हो गया है। कई जगहों पर गायों के संक्रमित होने और उनकी मौत होने के दावे भी किए जा रहे हैं, जिससे पशुपालकों और स्थानीय गौरक्षकों की नींद उड़ गई है।

जिले में सवा लाख गोवंश, तीन फीसदी तक पशु प्रभावित

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भिंड जिले में कुल गोवंश की संख्या करीब सवा लाख है। पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर अवनीश शर्मा ने बताया कि इनमें से लगभग 2 से 3 प्रतिशत पशु फिलहाल लंपी वायरस से प्रभावित पाए गए हैं। विभाग की ओर से संक्रमित मवेशियों की पहचान करने के लिए विभागीय एंबुलेंस के जरिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

पांच हजार गोवंश को टीके लगाने की तैयारी

बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने एहतियाती कदम उठाते हुए करीब 5 हजार पशुओं का टीकाकरण करने की तैयारी की है। जिन इलाकों में संक्रमण के मामले सामने आए हैं, वहां बीमार मवेशियों के इलाज और उनकी देखरेख पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

प्रशासन ने पशुपालकों से आग्रह किया है कि वे अपने बीमार पशुओं को स्वस्थ गोवंश से अलग रखें ताकि संक्रमण आगे न फैले। इसके अलावा, यदि मवेशियों में लंपी के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा विभाग को इसकी सूचना देने की सलाह दी गई है।

गौरक्षकों ने टीकाकरण की गति पर उठाए सवाल

दूसरी ओर, रावतपुरा कलां समेत कई अन्य गांवों के स्थानीय लोगों और गौरक्षकों ने हालात पर असंतोष जताया है। उनका कहना है कि कई जगहों पर गायों की हालत बेहद गंभीर है और कुछ पशुओं की मौत भी हो चुकी है।

गौरक्षक अंशुल विरथरे का आरोप है कि संक्रमण की सूचना मिलने के बावजूद शुरुआती दौर में इलाज और टीकाकरण की व्यवस्था उतनी तेजी से नहीं की गई जितनी जरूरत थी। उन्होंने मांग की है कि महामारी को रोकने के लिए गांव-गांव जाकर सर्वे किया जाए और युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाए।