भिंड जिले के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार और विकास के सिलसिले में लगभग तीन से साढ़े तीन दशक पहले किसानों की जमीनें अधिग्रहित की गई थीं। उस दौरान शासन-प्रशासन की ओर से किसानों को विभिन्न प्रकार के आश्वासन दिए गए थे, जिनमें स्थानीय स्तर पर रोजगार और मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता मुख्य रूप से शामिल थी।

तीस साल बाद भी नहीं पूरे हुए वादे

ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन छिन जाने के बाद उनके परिवारों को आज तक वे सुविधाएं और स्थायी रोजगार नहीं मिल सके, जिनका वादा अधिग्रहण के समय किया गया था। तीस साल से अधिक लंबा समय बीत जाने के बाद भी विस्थापित और प्रभावित परिवार उपेक्षित महसूस कर रहे हैं तथा बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

एमपीआईडीसी एमडी को सौंपा गया ज्ञापन

इसी सिलसिले में स्थानीय निवासियों और प्रभावित किसानों ने मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगम (एमपीआईडीसी) के प्रबंध निदेशक से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पूर्व में किए गए वादों को जल्द से जल्द अमलीजामा पहनाने की पुरजोर मांग उठाई गई।

ज्ञापन सौंपने वालों में क्षेत्र के कई गणमान्य लोग और जनप्रतिनिधि शामिल रहे। इस अवसर पर पूर्व सरपंच मेहताब सिंह गुर्जर, पूर्व उप सरपंच धनंजय शर्मा, मुकेश किरार, द्वारिका प्रसाद गौड़ और कमल किशोर तिवारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

आंदोलन की दी गई चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आगामी 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो वे शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाने को विवश होंगे। आंदोलन की रूपरेखा और आगामी रणनीति प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों की एक संयुक्त बैठक में तय की जाएगी।