ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले से आस्था और समर्पण का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पिता अपने आठ साल के बेटे की गंभीर बीमारी से निजात मिलने के बाद, अपनी मान्यता को पूरा करने के लिए अत्यंत कठिन परीक्षा दे रहा है। वह उत्तर प्रदेश के इटावा जिले स्थित विजयपुर गांव से दंदरौआ हनुमान धाम तक कीलों की शैया पर लेटकर दंडवत यात्रा कर रहा है।

छह माह की उम्र में पता चली थी बीमारी

धर्मेंद्र नामक इस पिता ने बताया कि जब उसका बेटा मात्र छह माह का था, तब डॉक्टरों ने जांच के दौरान उसके दिमाग की नस में ब्लड क्लॉट यानी रक्त के थक्के जमने की पुष्टि की थी। इस वजह से बच्चा लगातार बीमार रहता था। चिंता में डूबे धर्मेंद्र ने बेटे के इलाज के लिए दिल्ली सहित देश के कई बड़े चिकित्सा संस्थानों के चक्कर काटे और लगातार जांच कराई।

दंदरौआ धाम में लगाई थी विशेष अर्जी

इलाज के दौरान लगभग चार महीने पहले धर्मेंद्र अपने बीमार बेटे को लेकर प्रसिद्ध दंदरौआ धाम पहुंचा। वहां उसने हनुमान जी महाराज के दरबार में अर्जी लगाई और मनोकामना मांगी कि यदि उसका बेटा पूरी तरह स्वस्थ हो जाता है, तो वह दंडवत करते हुए धाम तक पहुंचेगा। इसके कुछ समय बाद ही बेटे की स्वास्थ्य स्थिति में चमत्कारी सुधार दिखने लगा।

धर्मेंद्र के अनुसार, मन्नत मांगने के महज पंद्रह दिन बाद जब वह बेटे को दिखाने दिल्ली के डॉक्टर के पास गया, तो उसकी जांच रिपोर्ट सामान्य आई। इसके बाद तीन महीने तक हुई लगातार जांचों में भी यही स्थिति रही। करीब पंद्रह दिन पहले डॉक्टर ने स्पष्ट कह दिया कि अब बच्चे को दिखाने के लिए दोबारा लाने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह पूरी तरह सामान्य है।

12 सितंबर से शुरू की कठिन दंडवत यात्रा

बेटे के स्वस्थ होने का भरोसा मिलते ही धर्मेंद्र ने अपनी मनौती पूरी करने का निर्णय लिया। उसने गत 12 सितंबर को अपने गृह ग्राम विजयपुर से दंदरौआ धाम के लिए दंडवत यात्रा का शुभारंभ किया। इस यात्रा को लगभग 25 दिनों में पूरा करने का उसका संकल्प है। इस कठिन मार्ग में वह गर्म डामर सड़क, पथरीले रास्तों और बारिश के बीच कीलों की शैया पर लेटकर आगे बढ़ रहा है और यात्रा के 11वें दिन वह भिंड जिले की सीमा में पहुंच गया है।

पिछले आठ साल से बेटे की बीमारी को लेकर परेशान था। अब तीन महीने से रिपोर्ट सामान्य आ रही है और डॉक्टर ने भी आने से मना कर दिया है। मैंने दंदरौआ हनुमान जी से जो मन्नत मांगी थी, उसे पूरा करने के लिए अब दंडवत करते हुए उनके दरबार जा रहा हूं।