भिंड जिले में आवारा घूम रहे गोवंश को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) वीरसिंह चौहान द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद स्थानीय पंचायतों में सरगर्मी तेज हो गई है। कुल आठ सरपंचों को उनके पदों से हटाने की चेतावनी मिलने के बाद से ग्रामीण क्षेत्रों में गोवंश को नियंत्रित करने के प्रयास युद्ध स्तर पर शुरू कर दिए गए हैं।

निरीक्षण के दौरान सामने आई थी लापरवाही

बीती 11 सितंबर को जिला पंचायत सीईओ ने मैदानी भ्रमण किया था, जिसमें मुख्य सड़कों, सार्वजनिक स्थलों और किसानों के खेतों में मवेशियों को खुलेआम घूमते हुए पाया गया था। स्थिति को गंभीरता से लेते हुए भिंड जनपद की मानपुरा, बाराकलां, ऊमरी, ढोंचरा व खेरा श्यामपुरा, लहार जनपद की लपवाहा व ररी तथा रौन जनपद की मेहदा पंचायत के सरपंचों को नोटिस थमाए गए थे।

प्रशासन का कहना है कि सड़कों पर घूम रहे इन मवेशियों के कारण आए दिन यातायात बाधित होता है और गंभीर सड़क दुर्घटनाओं में जन-धन की हानि की आशंका बनी रहती है। नोटिस में सभी संबंधित पंचायतों को गोवंश के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।

सरपंचों को दी गई है पद से पृथक करने की चेतावनी

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों द्वारा मवेशियों के प्रबंधन में बरती जा रही यह लापरवाही उनके पदीय दायित्वों के खिलाफ है। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत इन सरपंचों को उनके पद से हटाने की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। सभी आरोपित प्रतिनिधियों को 15 सितंबर यानी मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना जवाब और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

यदि निर्धारित समय पर प्रस्तुत किए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाते हैं, तो प्रशासन की ओर से एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा सकती है।

गांवों में कराई गई मुनादी, पशुओं को बांधने की अपील

कड़ी कार्रवाई के खतरे को भांपते हुए पंचायत प्रतिनिधियों ने अब जमीन पर प्रयास तेज कर दिए हैं। लपवाहा ग्राम पंचायत में सरपंच अरविंद शर्मा और सचिव रामकेश शर्मा की देखरेख में गांवभर में मुनादी कराई गई। इसमें ग्रामीणों से साफ तौर पर कहा गया है कि वे अपनी गायों को खुला न छोड़ें और उन्हें घरों में ही बांधकर रखें।

इस पूरी कवायद का मुख्य मकसद किसानों की फसलों को बर्बाद होने से बचाना और सड़कों पर मंडराते खतरे को कम करना है। अब मंगलवार को होने वाली सुनवाई के दौरान सरपंचों द्वारा रखे जाने वाले पक्षों और सबूतों के आधार पर ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी।

सरकारी गोशालाओं के संचालन पर उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर यह बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि जब शासन स्तर पर गोवंश के संरक्षण के लिए गोशालाएं बनाई गई हैं और उनके निर्माण, चारे-पानी तथा रख-रखाव पर भारी भरकम सरकारी बजट खर्च किया जाता है, तब भी मवेशी सड़कों और खेतों में क्यों भटक रहे हैं। बहरहाल, इस ताजा प्रशासनिक चाबुक के बाद पंचायतों पर अपनी व्यवस्थाओं को सुधारने का भारी दबाव बन गया है।