भिंड जिले की मिहोना नगर परिषद में गुटबाजी और भेदभाव के आरोप अब खुलकर सामने आ गए हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले तीन पार्षदों ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिषद में उनके वार्डों की लगातार अनदेखी की जा रही है और विकास कार्यों में भेदभाव हो रहा है।

बुनियादी सुविधाओं की उपेक्षा का आरोप

वार्ड क्रमांक 4, 11 और 15 के पार्षदों ने ज्ञापन में बताया कि उनके क्षेत्रों में पेयजल, सड़क, सीवर और नाली जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी बनी हुई है। इन समस्याओं को लेकर परिषद में कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पार्षदों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वार्ड-15 के पार्षद राजेश शितोले, वार्ड-11 की रेनू बरसेना और वार्ड-4 की उषा दौहरे ने संयुक्त रूप से सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि नगर परिषद की बैठकों, विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक फैसलों में उनके साथ पक्षपात किया जाता है। उनके सुझावों को अनसुना किया जाता है और विकास योजनाओं में उनके वार्डों को प्राथमिकता नहीं दी जाती।

वित्तीय अनियमितताओं की भी आशंका

पार्षद राजेश शितोले ने विशेष रूप से पेयजल संकट की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में नल-जल योजना और बोरिंग के बावजूद लोगों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। वार्डवासी लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन परिषद में उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि परिषद में केवल कुछ खास लोगों के वार्डों में ही विकास कार्य कराए जा रहे हैं।

ज्ञापन में नगर परिषद के विकास कार्यों और वित्तीय लेन-देन में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए हैं। पार्षदों ने मांग की है कि सभी विकास कार्यों और खर्चों की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

आरटीआई जानकारी न देने पर भी सवाल

पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी भी उन्हें समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई है। इससे यह आशंका पैदा होती है कि तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कलेक्टर से आरटीआई की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करने का अनुरोध किया है।