भिंड जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों को बेहतर करने के लिए शिक्षा विभाग ने एक नई और सख्त योजना पर काम शुरू कर दिया है। इसके अंतर्गत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में एक एक्सीलेंस मॉनिटरिंग सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इस सेंटर के जरिए स्कूलों में चल रही पढ़ाई, बच्चों की उपस्थिति और सिलेबस पूरा होने की गति पर सीधी नजर रखी जाएगी।

रोजाना दिए जाएंगे टास्क, ऐसे होगी प्रगति की परख

इस मॉनिटरिंग सिस्टम के माध्यम से सभी विद्यालयों को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े दैनिक टास्क सौंपे जाएंगे। इन कार्यों के आधार पर यह परखा जाएगा कि पाठ्यक्रम समय पर पूरा हो रहा है या नहीं और छात्रों की सीखने की गति कैसी है। जरूरत पड़ने पर शिक्षकों से ऑनलाइन माध्यम से भी ब्योरा मांगा जाएगा, ताकि कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए विशेष सुधार के उपाय किए जा सकें।

प्राचार्यों और शिक्षकों की तय होगी सीधी जवाबदेही

नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब स्कूलों की शैक्षणिक सेहत के लिए वहां के प्राचार्यों और शिक्षकों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। स्कूलवार समीक्षा के जरिए यह देखा जाएगा कि कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति कैसी है और परीक्षा परिणाम को सुधारने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। जिन स्कूलों का प्रदर्शन कमजोर मिलेगा, उन्हें चिह्नित करके सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

सेवानिवृत्त शिक्षकों और अमले को सौंपी जाएगी जिम्मेदारी

मॉनिटरिंग सेंटर के संचालन के लिए विभाग वर्तमान के साथ-साथ सेवानिवृत्त शिक्षकों और कर्मचारियों की एक टीम तैयार कर रहा है। यह टीम ब्लॉक स्तर से विद्यालयों की सूचनाएं एकत्र कर उनका गहराई से विश्लेषण करेगी। इसके अलावा, अन्य विभागों में अटैच ऐसे कर्मचारियों और शिक्षकों की सेवाएं भी हफ्ते में एक-दो दिन लेने की योजना है, जिनके पास वर्तमान दफ्तरों में काम का बोझ कम है।

जिले में कुल मिलाकर करीब 2,400 सरकारी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनमें से शुरुआती चरण में 163 हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी विद्यालयों पर पूरा फोकस रखा जाएगा। शुरुआत 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं वाले स्कूलों से होगी और इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पहली से आठवीं तक के विद्यालयों को भी इस घेरे में शामिल किया जाएगा।

इस पूरी कार्ययोजना के तहत विभाग का लक्ष्य सांदीपनि और शासकीय उत्कृष्ट विद्यालयों के बोर्ड परीक्षा परिणामों को शत-प्रतिशत करना है। इसके लिए पालक-शिक्षक संघों को भी सक्रिय किया जा रहा है ताकि बच्चों की पढ़ाई लिखाई में अभिभावकों की भागीदारी और संवाद को और मजबूत किया जा सके।

जिला शिक्षा अधिकारी सुधांशु द्विवेदी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि एक्सीलेंस मॉनिटरिंग सेंटर को धरातल पर उतारने के लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसका मुख्य मकसद सरकारी स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाना और विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की हर दिन मॉनिटरिंग करना है।