मध्यप्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. गोविंद सिंह ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार के सामने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने देश में लागू किए गए यूजीसी कानून को पूरी तरह से और तत्काल प्रभाव से वापस लिए जाने की पुरजोर मांग की है।

सभी पक्षों की सहमति से हो कानून में बदलाव

डॉ. गोविंद सिंह का तर्क है कि यदि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार का संशोधन करना ही था या कोई नया कानून लाना आवश्यक था, तो इसके लिए पहले तमाम संबंधित पक्षों और हितधारकों की एक व्यापक बैठक बुलाई जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बिना आम सहमति के थोपे गए ऐसे फैसलों से आम जनता और शिक्षा जगत में असंतोष फैलता है।

भाईचारे में दरार और वैमनस्यता फैलाने का आरोप

कांग्रेस नेता ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान समय में देश के सभी छात्र, युवा और विभिन्न जातियों तथा धर्मों के नागरिक आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून को लाने की देश में कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन इसे लागू करके समाज में दूरियां बढ़ाई जा रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूजीसी लागू करके आपसी भाईचारे में दरार पैदा की है और देश में जातिगत संघर्ष कराने का काम किया है।

कानून हो तो सभी के लिए हो एक समान

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए डॉ. सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यदि देश में किसी भी प्रकार का नया नियम या कानून लागू किया जाता है, तो उसे बिना किसी भेदभाव और पक्षपात के देश के हर नागरिक पर एक समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।