भिंड जिले के अंतर्गत आने वाली आलमपुर कृषि उपज मंडी और दबोह उपमंडी इन दिनों भारी बदहाली का शिकार हैं। बारिश के मौसम के कारण दोनों ही परिसरों में पानी और कीचड़ जमा हो जाने से हालात दलदल जैसे बन गए हैं। हर साल शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व देने वाले अन्नदाता और व्यापारी इस व्यवस्था से खासे परेशान हैं।

तीन दशक से अधिक समय से पक्की सड़क का इंतजार

आलमपुर मंडी भिंड और दतिया जिलों के एक सौ से ज्यादा गांवों के किसानों के लिए प्रमुख व्यापारिक केंद्र है। करीब साठ साल पुरानी इस मंडी को साल 1992 में मौजूदा स्थल पर स्थानांतरित किया गया था। हैरानी की बात यह है कि पिछले तैंतीस वर्षों में यहां एक बार भी सीसी सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है, जिसके चलते मुख्य प्रवेश द्वार से कार्यालय तक का मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।

दबोह उपमंडी में किराए की इमारत और कानूनी पेच

दूसरी ओर दबोह उपमंडी की स्थिति इससे भी ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। यहां का कार्यालय लंबे अर्से से किराए के भवन में संचालित हो रहा है और मंडी प्रांगण भी समिति के नाम दर्ज नहीं है। वर्तमान में इस उपमंडी परिसर में दो फीट तक कीचड़ भरा हुआ है, जिससे माल लाने वाले वाहनों के पहिये थम गए हैं और जमीन के स्वामित्व का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

व्यापार प्रभावित, प्रशासन ने दिया जल्द सुधार का भरोसा

परिसरों में कीचड़ और फिसलन होने के कारण किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉली अंदर नहीं आ पा रहे हैं। इससे अनाजों की नीलामी और खरीद-फरोख्त का काम लगभग ठप पड़ गया है। इस संबंध में मंडी सचिव रमेश जाटव ने स्पष्ट किया है कि दबोह मंडी का मामला अदालत में लंबित होने के कारण अड़चनें हैं, वहीं आलमपुर में बरसात का दौर थमते ही सीसी रोड बनवाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।