भिंड के शासकीय एमजेएस महाविद्यालय में प्रशासनिक व्यवस्थाओं और वित्तीय मामलों को लेकर तनाव की स्थिति बन गई है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राम अवधेश शर्मा के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बैनर तले छात्र और कार्यकर्ता मुखर हो गए हैं। संगठन से जुड़े युवाओं ने कॉलेज परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है और प्राचार्य पर गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं।

बस संचालन और स्टेशनरी खरीदी पर उठे सवाल

एबीवीपी नेताओं सुमित दीक्षित और रिषेंद्र सिंह राजावत का कहना है कि सत्र 2024-25 के दौरान कॉलेज में बस संचालन के लिए 4 हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से निविदा मंजूर की गई थी। इसके बाद अगले सत्र में इसी बस के वास्ते 3400 रुपए प्रतिदिन की दर से भुगतान किए जाने का दावा किया गया है। परिषद ने इस वित्तीय अंतर को संदिग्ध मानते हुए इसकी विस्तृत जांच की मांग की है।

इसके अलावा सितंबर 2025 में स्टेशनरी खरीदने के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया को बीच में ही रद्द कर दिया गया था। आरोप है कि इसके बाद एक निजी फर्म से सीधे तौर पर लाखों रुपए की स्टेशनरी खरीद ली गई, जिसमें भंडार क्रय नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया।

बिना अनुमति सामग्री खरीद और खेल मद में गड़बड़ी का दावा

छात्र संगठन द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में जिक्र किया गया है कि तत्कालीन कलेक्टर के तबादले के पश्चात करीब 5 लाख रुपए की विभिन्न सामग्री खरीदी गई थी। परिषद का आरोप है कि यह पूरी खरीदारी वर्तमान पदेन जनभागीदारी अध्यक्ष की बिना किसी अनुमति के की गई, जिसके सभी दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच होनी चाहिए।

छात्रों ने वर्ष 2024-25 के दौरान खेल मद से जुड़े 8.62 लाख रुपए अलग-अलग चेकों के माध्यम से सीधे निजी खातों में ट्रांसफर करने का भी आरोप लगाया है। एबीवीपी का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध है और इससे जुड़े बैंक लेन-देन की जांच कराई जानी चाहिए। पीएम श्री महाविद्यालय के विकास और मरम्मत के लिए आवंटित 40 लाख रुपए के फंड के सही उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं।

पेड़ों की कटाई और विकास राशि के दुरुपयोग का आरोप

धरने पर बैठे छात्रों ने कॉलेज परिसर में बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के हरे पेड़ कटवाने का संगीन आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि लगभग 25 क्विंटल लकड़ी बाजार में बेच दी गई, लेकिन उसकी बिक्री से मिली धनराशि को कॉलेज के आधिकारिक कोष में जमा नहीं कराया गया है।

इसके साथ ही पुस्तकालय के विकास के लिए मिले 14 लाख रुपए और प्रयोगशाला के उन्नयन के लिए प्राप्त 15 लाख रुपए की राशि के उपयोग को लेकर भी निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। छात्रों का आरोप है कि उचित प्रक्रिया के अभाव में विद्यार्थियों को इन योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया है। इन सभी बिंदुओं को प्रमुखता से उठाते हुए उच्च शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया है।