ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले में वन विभाग के एक बड़े अधिकारी के खिलाफ आई शिकायत पर पंद्रह दिन से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी प्रशासनिक सुस्ती बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर की गई इस शिकायत की फाइल अधिकारियों के बीच ही उलझकर रह गई है।

सेवा रिकॉर्ड में संतानों की जानकारी छिपाने का है मामला

भिंड निवासी अनिल कुमार ने बीते सत्रह सितंबर को डीएफओ भिंड और सीसीएफ ग्वालियर को लिखित शिकायत सौंपी थी। इसमें फॉरेस्ट एसडीओ रामकुमार पर यह आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने शासकीय सेवा रिकॉर्ड में संतान संबंधी पूरी जानकारी नहीं दी है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड में केवल शिवांगी अरोलीया का जिक्र मिलता है। वहीं, परिवार आईडी और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में हिमांशी अरोलीया और वान्या अरोलीया समेत कुल पांच संतानों के होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने इसके समर्थन में कुछ दस्तावेज भी पेश किए हैं।

कार्यालयों के चक्कर काट रही फाइल, जांच अधिकारी तय नहीं

इस पूरे मामले में जब डीएफओ बीआर सरसाम से पक्ष जाना गया, तो उनका कहना था कि इस प्रकरण में जांच के संबंध में सीसीएफ ग्वालियर को पत्र भेजा जा चुका है। दूसरी ओर, जब सीसीएफ ललित भारती से इस बारे में बात की गई, तो उनका कहना था कि उन्हें इस तरह के किसी भी पत्र के आने की कोई जानकारी नहीं है।

दोनों वरिष्ठ अधिकारियों के अलग-अलग बयानों से यह साफ हो गया है कि सत्रह सितंबर को आवेदन मिलने के बावजूद पंद्रह दिन बीतने पर भी अब तक कोई जांच दल या जांच अधिकारी नियुक्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को दबाने के लिए औपचारिकताएं पूरी नहीं की जा रही हैं।

भोपाल तक मामले को ले जाने की चेतावनी

शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने दोटूक कहा है कि उनके पास इस मामले से जुड़े पुख्ता सबूत और दस्तावेज मौजूद हैं। यदि स्थानीय स्तर पर विभाग ने जल्द निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की, तो वह इस शिकायत को भोपाल स्थित उच्च स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।

उल्लेखनीय है कि वन विभाग में शिकायतों के लंबित रहने का यह कोई पहला वाकया नहीं है। इससे पहले खुद एसडीओ रामकुमार द्वारा फॉरेस्ट रेंजर कृतिका शुक्ला के खिलाफ की गई एक शिकायत भी विभाग में विचाराधीन पड़ी हुई है।