ग्वालियर-चंबल संभाग के भिंड जिले में वन विभाग में पदस्थ एसडीओ रामकुमार एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। उन पर अपनी पांच संतानों से जुड़ी जानकारी सेवा अभिलेखों में छिपाने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने मुख्यमंत्री कार्यालय और सीएम हेल्पलाइन में गुहार लगाई है, जिसके बाद प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
सेवा अभिलेखों में नहीं दिया गया पूरा विवरण
शिकायतकर्ता अनिल कुमार द्वारा 17 अक्टूबर को दिए गए आवेदन में बताया गया है कि सहायक वन संरक्षक के पद पर कार्यरत अधिकारी ने शासन को अपने परिवार से जुड़ी सही और पूरी जानकारी नहीं सौंपी। आरोप है कि एसडीओ की पांच बेटियां हैं, जबकि उनके सरकारी सेवा अभिलेख में केवल एक बेटी शिवानी अरोलीया का नाम ही दर्ज कराया गया है।
इसके अलावा, परिवार आईडी में हिमांशी अरोलीया और वान्या अरोलीया के नाम भी दर्ज होने का दावा किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि बाकी दो बेटियों की जानकारी भी आधिकारिक रिकॉर्ड से गायब रखी गई है, जिससे नियमों के उल्लंघन का अंदेशा जताया जा रहा है।
ग्वालियर से होते हुए मामला पहुंचा सीएम हेल्पलाइन
शुरुआती शिकायत भिंड डीएफओ कार्यालय में दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद मामले की जांच के लिए ग्वालियर के मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर किसी अन्य वन मंडल से जांच कराने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, समय पर अपेक्षित कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने भोपाल मुख्यालय और सीएम ऑफिस का रुख किया।
मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्देश मिलने के बाद 21 अक्टूबर को इस मामले को आधिकारिक रूप से सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कर लिया गया। अब इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर नियमानुसार उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की जा रही है।
एल-1 स्तर से शुरू होगी जांच प्रक्रिया
सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज होने के बाद इस शिकायत का निराकरण अब पहले यानी एल-1 स्तर से शुरू होगा। भिंड वन विभाग में पदस्थ वन परिक्षेत्र अधिकारी आरके दीक्षित इस स्तर पर प्रक्रिया से जुड़े हैं, हालांकि उनकी भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। यदि इस स्तर पर समाधान नहीं निकलता है, तो मामला आगे के उच्च स्तरों तक पहुंच सकता है।
गौरतलब है कि इससे पहले यह विभाग एसडीओ रामकुमार और रेंजर कृतिका शुक्ला के बीच हुए आपसी विवाद को लेकर भी सुर्खियों में रहा था, जिसे बाद में अधिकारियों की मध्यस्थता से सुलझाने की बात सामने आई थी। बहरहाल, अब संतानों की जानकारी छिपाने के इस नए मामले में दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति साफ हो सकेगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!