भिंड जिले में ठगी का एक नया मामला सामने आया है, जहां 'ऑरोरा एक्स' नाम की कंपनी के माध्यम से लोगों को मात्र 40 दिन में रकम दोगुनी करने का सब्जबाग दिखाया गया था। कंपनी से जुड़े लोगों के अचानक गायब हो जाने और सामने नहीं आने के कारण स्थानीय निवेशकों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। पिछले 10 दिनों से निवेशक लगातार कोशिश करने के बावजूद अपने पैसे ऐप के जरिए निकाल पाने में असफल साबित हो रहे हैं।

अगस्त में शुरू हुआ था कारोबार, ग्रामीण इलाकों तक फैला नेटवर्क

पीड़ित निवेशकों के अनुसार, इस कंपनी ने भिंड में अपने कारोबार की शुरुआत इसी साल अगस्त के महीने में की थी। शुरुआत में पावई और पिथनपुरा क्षेत्र से इसका कामकाज शुरू हुआ, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़कर ग्रामीण इलाकों तक पहुंच गया। कंपनी के नुमाइंदों ने कम अवधि में पैसे को दोगुना करने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाया। ऐप पर निवेशकों को ट्रेडिंग के जरिए मुनाफा होता हुआ भी दिखाया जाता था, जिससे उनका भरोसा और मजबूत हो गया और उन्होंने बेझिझक पूंजी लगा दी।

14 अक्टूबर से बंद हुई निकासी, 23 के बाद संवाद पूरी तरह ठप

कारोबार सामान्य चलने के बाद 14 अक्टूबर से ऐप पर निवेशकों की रकम की निकासी अचानक रोक दी गई। कंपनी के नुमाइंदों ने इसके पीछे ऐप को प्ले स्टोर पर लाने और उसे अपडेट किए जाने का बहाना बनाया। व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से निवेशकों को सब्र रखने की सलाह दी जाती रही और पैसे निकालने की तारीख बार-बार आगे खिसकाई जाती रही। आखिरी बार 23 अक्टूबर को निवेशकों को भुगतान शुरू होने का भरोसा दिलाया गया था, लेकिन इसके बाद से ग्रुप पर किसी भी तरह के नए संदेश आने बंद हो गए।

स्थानीय स्तर पर अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए कंपनी ने भिंड में विधिवत कार्यालय भी खोला था। इस दफ्तर का उद्घाटन जिले के एक जाने-माने संत के कर-कमलों से कराया गया था। प्रचार-प्रसार के लिए शहर में कई जगहों पर बैनर लगवाए गए थे। इसके अलावा अटेर क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में जाकर बच्चों को पठन-पाठन सामग्री भी बांटी गई थी, जिसमें एक पूर्व जनप्रतिनिधि के भाई बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। इन हथकंडों के जरिए कंपनी ने स्थानीय लोगों का विश्वास जीता, लेकिन अब उनका मुख्य कार्यालय लंबे समय से बंद है और निवेशक अपनी जमा पूंजी बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

नीतेश तोमर का नाम आया सामने, पुलिस जांच में जुटी

पड़ताल के दौरान इस पूरे फर्जीवाड़े के पंजीयन और संचालन से जुड़े शख्स के रूप में नीतेश तोमर का नाम सामने आ रहा है। हालांकि, इस ठगी में और कौन-कौन लोग शामिल थे, कुल कितनी रकम का निवेश हुआ है और वास्तव में कितने लोग प्रभावित हुए हैं, इसकी अधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

पुलिस पिछले तीन महीने से लगातार लोगों को ऐसी फर्जी निवेश योजनाओं के प्रति जागरूक कर रही थी। हमारे पास कुछ शिकायतकर्ता सामने आए हैं, और साइबर टीम इस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है। जांच पूरी होने के बाद जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी और आरोपियों को शिकंजे में लिया जाएगा। - निरंजन राजपूत, सीएसपी