भिंड जिले के कनावर गांव में क्वारी नदी पर बना वह पुल कृष्णा भदौरिया के लिए सिर्फ एक रास्ता नहीं था, बल्कि उसके फौज में अफसर बनने के सपनों की उड़ान का गवाह था। कृष्णा ने हाल ही में नेवी की परीक्षा पास की थी और वह फिजिकल टेस्ट की तैयारी के लिए रोजाना इसी पुल के आसपास दौड़ लगाया करता था। लेकिन किसे पता था कि जिस नदी के किनारे वह अपने भविष्य को संवारने की दौड़ दौड़ता था, वहीं उसकी जीवन यात्रा थम जाएगी।

पहली बार घर में बैठाए थे बप्पा, विसर्जन के दौरान हुआ हादसा

परिवार के लोगों ने बताया कि इस बार उनके घर में पहली बार गणपति महोत्सव का आयोजन किया गया था। अनुष्ठान पूरा होने के बाद प्रतिमा विसर्जन के लिए कृष्णा अपने दोस्तों मदन सिंह भदौरिया और अभिजीत सिंह भदौरिया के साथ क्वारी नदी पर पहुंचा था। उनके साथ कृष्णा की मां पार्वती और छोटा भाई विष्णु समेत करीब आठ से दस लड़के भी मौजूद थे।

नदी के तट पर शुरुआत में पानी काफी कम लग रहा था, जिससे युवकों को गहराई का जरा भी अंदाजा नहीं हुआ। वे जल्दी प्रतिमा विसर्जित कर घर लौटना चाहते थे, लेकिन पानी में उतरते ही स्थिति अचानक बदल गई।

एक को बचाने के चक्कर में तीनों गहरे पानी में समाए

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, सबसे पहले मदन गहरे पानी की तरफ चला गया। उसे संकट में देख कृष्णा उसे बचाने के लिए आगे बढ़ा और फिर अभिजीत भी दोनों की मदद के लिए पानी में उतर गया। कुछ ही पलों में तीनों एक गहरे गड्ढे की चपेट में आ गए और पानी में डूबने लगे।

नदी के किनारे खड़ी कृष्णा की मां पार्वती यह सब अपनी आंखों से देख रही थीं। उन्होंने बेटों को वापस लौटने के लिए जोर-जोर से आवाज लगाई और मदद के लिए चीखती रहीं, लेकिन जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते, बहुत देर हो चुकी थी।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, भाई ने दी पुलिस को सूचना

घटना के वक्त कृष्णा का छोटा भाई विष्णु भी वहीं मौजूद था। कृष्णा ने उसे किनारे पर ही रुककर वीडियो बनाने के लिए कहा था। भाइयों को डूबता देख विष्णु ने तुरंत पुलिस और ग्रामीणों को फोन पर घटना की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला और पुलिस मौके पर पहुंची तथा स्थानीय गोताखोरों की मदद से युवकों की तलाश शुरू की गई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे कनावर गांव में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस परिवार के साथ हुई अनहोनी से स्तब्ध है।