अंचल के भिंड जिले में मानसून के दौरान बेसली नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात किस कदर चुनौतीपूर्ण हो गए हैं, इसकी बानो नदरोली गांव से सामने आई है। संपर्क कट जाने के कारण यहां विद्यार्थियों और शिक्षकों को अपनी जान जोखिम में डालकर ट्यूब और मटकी के सहारे उफनती नदी पार करनी पड़ रही थी। इस गंभीर स्थिति को स्थानीय स्तर पर प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया है।

मौके पर पहुंचे जिला शिक्षा अधिकारी

हालात की गंभीरता को भांपते हुए जिला शिक्षा अधिकारी सुधांशु द्विवेदी रविवार शाम सीधे बेसली नदी के तट पर पहुंच गए। उन्होंने वहां नदी के तेज बहाव का जायजा लिया। पानी का वेग इतना अधिक था कि अधिकारी खुद ट्यूब के सहारे नदी पार करके स्कूल तक नहीं पहुंच सके।

इसके बाद उन्होंने मौके पर ही शिक्षकों को बुलवाया और स्कूल में दर्ज बच्चों की संख्या तथा रोजमर्रा आ रही परेशानियों की पूरी जानकारी जुटाई। डीईओ ने कड़े निर्देश दिए कि जब तक नदी का बहाव तेज है, किसी भी स्थिति में बच्चों को ट्यूब या मटकी के सहारे नदी पार न कराया जाए और शिक्षकों को भी ऐसे बड़े जोखिमों से दूर रहने की हिदायत दी गई।

नदरोली की आबादी और स्कूली बच्चों का संकट

नदरोली गांव की करीब एक हजार की आबादी हर साल बारिश के दिनों में सड़क संपर्क कटने की मार झेलती है। स्कूल जाने वाले नौनिहालों और पढ़ाने वाले गुरुजी के सामने हर रोज नदी पार करने की मजबूरी बनी रहती है। अब प्रशासनिक अमले के मुआयने के बाद ग्रामीणों को इस समस्या से स्थायी या अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए चार नए विकल्प

शिक्षा विभाग ने बच्चों की शिक्षा बाधित न हो और आवागमन सुरक्षित हो सके, इसके लिए चार मुख्य विकल्पों पर मंथन शुरू किया है। पहले विकल्प के तहत नदरोली के उन 20 विद्यार्थियों को जो बेसली नदी पार करके पराये के पुरा पढ़ने जाते हैं, उन्हें वहीं के प्राथमिक स्कूल में पढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके लिए अतिरिक्त शिक्षक की व्यवस्था की जा सकती है ताकि बच्चों को रोज नदी न पार करनी पड़े।

दूसरे विकल्प के रूप में विभाग नदरोली के स्कूल में पदस्थ पांच शिक्षकों को एक-एक सप्ताह के लिए गांव में ही ठहरने की व्यवस्था पर विचार कर रहा है। वैकल्पिक तौर पर शिक्षकों की ऐसी ड्यूटी लगाई जा सकती है जिससे उनकी जान जोखिम में न पड़े। तीसरे विकल्प में नदी के दोनों सिरों पर मजबूत रस्सी बांधकर उसके सहारे नाव चलाने का सुझाव है, जिससे तेज बहाव में नाव भटके नहीं। वहीं चौथे और अंतिम प्रस्ताव के तौर पर नदी में स्टीमर या सुरक्षित नावें संचालित करने पर भी विचार किया जा रहा है।