राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने भिंड और दतिया जिलों से गुजरने वाली सिंध नदी में धड़ल्ले से चल रहे अवैध रेत उत्खनन के मामले में कड़ा संज्ञान लिया है। यह कार्रवाई प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई है।

भिंड और दतिया के गांवों में हो रहा मनमाने ढंग से खनन

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने ट्रिब्यूनल के समक्ष तथ्यात्मक जानकारी रखी कि भिंड जिले के 18 और दतिया जिले के 6 गांवों की सीमा में सिंध नदी से भारी भरकम अर्थ-मूविंग मशीनों और सक्शन-ड्रेजिंग नौकाओं के जरिए अवैध रूप से रेत का दोहन किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखा गया है।

सामने आया है कि यह सारा अवैध उत्खनन बिना किसी वैध पर्यावरण स्वीकृति यानी ईसी और जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के धड़ल्ले से अंजाम दिया जा रहा है। इसके अलावा, निकाली जा रही रेत को बिना वैध ट्रांजिट परमिट के मध्य प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में भी खपाया जा रहा है।

चंबल घड़ियाल अभयारण्य की जैव विविधता पर मंडराया गंभीर संकट

याचिका में इस बात पर भी विशेष जोर दिया गया है कि सिंध नदी का यह क्षेत्र राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव घड़ियाल अभयारण्य का एक बेहद संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह पूरा इलाका घड़ियालों, मगरमच्छों, इंडियन फ्लैपशेल कछुओं और तमाम दुर्लभ प्रवासी पक्षियों का मुख्य प्रजनन स्थल माना जाता है।

शिकायत में बताया गया कि भारी मशीनों के इस्तेमाल से नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। साथ ही, जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ गया है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

समिति को सौंपा गया स्थलीय निरीक्षण का जिम्मा

इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए एनजीटी की न्यायिक बेंच ने एक तीन सदस्यीय संयुक्त समिति का गठन किया है। इस समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मध्य प्रदेश पर्यावरण विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया गया है।

एनजीटी ने इस समिति को निर्देश दिए हैं कि वह जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण करे। इसके बाद छह सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत तथ्यात्मक और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल के समक्ष पेश करनी होगी।

इसके अतिरिक्त, एनजीटी ने मध्य प्रदेश शासन समेत सभी संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। इस पूरे प्रकरण की अगली सुनवाई अब आगामी 7 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।