भिंड जिले के लहार कस्बे के भीतर पिछले दो महीनों से बंदरों का भारी उत्पात देखने को मिल रहा है। यहां लगभग दो दर्जन बंदरों का झुंड आवासीय इलाकों की छतों से होते हुए सीधे घरों के आंगन और कमरों के भीतर तक धावा बोल रहा है। इन आवारा जानवरों के अचानक हमलावर हो जाने की वजह से बच्चे, व्यापारी, बुजुर्ग और वकील तक गंभीर रूप से जख्मी हो चुके हैं, जिससे स्थानीय आबादी में भारी भय का माहौल है।
कचहरी से लौटे अधिवक्ता और बच्ची पर किया हमला
कस्बे के वार्ड क्रमांक 11 स्थित मढ़यापुरा निवासी अधिवक्ता रमेश भारद्वाज हाल ही में न्यायालय से अपने घर लौटे थे। उन्होंने जैसे ही घर के बाहर अपनी स्कूटी रोकी, वैसे ही पेड़ पर बैठे एक बंदर ने उन पर पीछे से अचानक हमला बोल दिया। बंदर उनके शरीर को बुरी तरह नोचकर मौके से भाग निकला, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ा।
इसी तरह मंगलवार की सुबह मंगदस्त इलाके में एक अन्य घटना सामने आई, जहां आठ वर्षीय विपुल यादव पर बंदर ने झपट्टा मारकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। लहार के चौधरी मोहल्ला, ब्राह्मणपुरा, पचौरी मोहल्ला, तिवारीपुरा, पुराना बाजार और रामलीला मैदान जैसे तमाम हिस्सों में इस तरह की घटनाएं आम हो चुकी हैं, जिससे लोग अपने घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं।
दो साल पहले जा चुकी है एक युवक की जान
लहार क्षेत्र में बंदरों का यह खतरा कोई नया नहीं है। इससे पहले करीब दो साल पहले पोस्ट ऑफिस गली के पास एक युवक पर बंदर ने हमला किया था। उस वक्त वह मकान की दूसरी मंजिल पर था और बंदर के आक्रामक तेवर से घबराकर नीचे गिर गया था। इस हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और उसकी जान चली गई थी। इस पुरानी त्रासद घटना के बावजूद आज तक इस समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकाला जा सका है।
वन विभाग की लाचारी और नागरिकों की मांग
बंदरों के इस बढ़ते आतंक पर जब वन विभाग के रेंजर रूपकुमार दीक्षित से बात की गई, तो उन्होंने हैरान करने वाला बयान दिया। उनका कहना था कि लाल मुंह वाले इन बंदरों को काबू करने के लिए उनके विभाग के पास कोई भी प्रशिक्षित दस्ता नहीं है। ऐसे हालात में मथुरा जिले से प्राइवेट विशेषज्ञों को बुलाना पड़ता है, जिसके लिए विभाग के पास कोई निर्धारित बजट या फंडिंग भी नहीं होती है।
विभाग द्वारा जिम्मेदारी लेने से साफ इंकार करने के बाद अब स्थानीय जनता के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है कि वे अपनी सुरक्षा के लिए किससे गुहार लगाएं। लगातार बढ़ते हमलों और प्रशासनिक उदासीनता के बीच लहार के लोग जल्द से जल्द इन बंदरों को पकड़कर शहर से दूर छोड़ने और इस समस्या से निजात दिलाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!