ग्वालियर-चंबल अंचल के भिंड जिले में ग्रामीण आबादी के भूखंडों की रजिस्ट्री का बहुप्रतीक्षित कार्य पटवारियों के कड़े विरोध के कारण अटक गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार गुरुवार से यह प्रक्रिया शुरू होनी थी, परंतु जिले के ग्रामीण अंचलों में पहले दिन एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई।
क्या है पटवारियों की मुख्य आपत्ति और मांग
सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत तैयार हो रहे रजिस्ट्री दस्तावेजों में पटवारी का नाम दर्ज किया जा रहा है। पटवारियों ने आशंका जताई है कि यदि आने वाले समय में इन जमीनों या भूखंडों को लेकर किसी प्रकार का विवाद पैदा होता है, तो उन्हें व्यक्तिगत तौर पर कसूरवार ठहराया जा सकता है।
इसी आशंका के चलते पटवारियों ने मांग उठाई है कि दस्तावेजों में उनका नाम शामिल करने के बजाय 'मध्यप्रदेश शासन' का उल्लेख किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जब यह पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक और शासन के निर्देशों पर संचालित हो रही है, तो उसकी कानूनी जिम्मेदारी भी शासन के स्तर पर ही तय होनी चाहिए।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और मुख्य सचिव के निर्देशों का असर
इससे पहले, राजस्व विभाग के मुख्य सचिव की तरफ से यह स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाले संभावित विवादों से पटवारियों को अलग रखा जाएगा। हालांकि, इसके बावजूद पटवारी इस व्यवस्था से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका मानना है कि केवल मौखिक या कागजी आश्वासन काफी नहीं है, बल्कि दस्तावेजों से उनका नाम पूरी तरह हटाया जाना चाहिए।
अपनी इसी मांग को लेकर बीते दिनों पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष विनायक सिंह तोमर की अगुवाई में दो सौ से अधिक पटवारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया था और प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा था। इसी नाराजगी के परिणामस्वरूप गुरुवार से निर्धारित रजिस्ट्री कार्य से पटवारी पूरी तरह दूर रहे।
1.29 लाख भूखंडों का होना है अभिलेखीकरण
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, भिंड जिले के भीतर स्वामित्व योजना के तहत कुल 1 लाख 29 हजार 64 भूखंडों की रजिस्ट्री की जानी है। इस पूरी योजना के दायरे में करीब 1 लाख 89 हजार 948 लोगों के संपत्ति अधिकारों का अभिलेखीकरण किया जाना तय किया गया है, जिसके लिए लगभग 450 पटवारियों की ड्यूटी लगाई गई थी।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में लंबे समय से काबिज लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाना है। वैधानिक दस्तावेज मिलने से ग्रामीणों को संपत्ति की खरीद-फरोख्त, उत्तराधिकार तय करने और अन्य कानूनी कार्यों में खासी आसानी होने की उम्मीद जताई जा रही थी।
इस पूरे मामले पर स्वामित्व योजना के नोडल अधिकारी एवं अपर कलेक्टर राजन बी नाडिया का कहना है कि जिले में योजना के तहत फिलहाल एक भी रजिस्ट्री नहीं हो पाई है। प्रशासन द्वारा इस बात की समीक्षा की जा रही है कि काम न होने के असल कारण क्या रहे हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!