भिंड शहर के मध्य स्थित गौरी तालाब को प्रदूषण मुक्त बनाने और उसमें गंदा पानी मिलने से रोकने के लिए स्थानीय प्रशासन ने अपनी कार्ययोजना में बदलाव किया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी में चली सुनवाई के दौरान इस जल स्त्रोत के आसपास निर्माण कार्यों के लिए पहले तय किए गए 100 मीटर के प्रतिबंधित दायरे को अब संशोधित कर 50 मीटर कर दिया गया है।
पहले 100 मीटर के दायरे में मिले थे सैकड़ों निर्माण
पूर्व में एनजीटी के सख्त निर्देशों के बाद नगर पालिका ने गौरी तालाब के चारों तरफ 100 मीटर के दायरे का भौतिक सत्यापन करवाया था। उस शुरुआती सर्वे के दौरान करीब 786 मकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस दायरे की जद में चिन्हित किए गए थे। कई जगहों पर पालिका अमले द्वारा इमारतों पर निशान भी लगाए जा चुके थे, जिससे स्थानीय रहवासियों में अपनी संपत्तियों पर संभावित कार्रवाई को लेकर चिंता बनी हुई थी।
नए सर्वे में भवनों के साथ परखी जाएगी सीवर व्यवस्था
दायरे को आधा यानी 50 मीटर किए जाने के बाद अब नए सिरे से गणना की जाएगी ताकि यह साफ हो सके कि संशोधित सीमा के भीतर वास्तविक तौर पर कितने भवन आ रहे हैं। इस बार के सर्वे का दायरा केवल दूरी मापने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि इन तमाम इमारतों से निकलने वाला सीवर और घरेलू गंदा पानी किन रास्तों से होकर तालाब तक पहुंच रहा है।
गंदा पानी सीधे तालाब में डालने वालों पर होगी कार्रवाई
नगर पालिका के अधिकारियों का कहना है कि सर्वे के दौरान यदि किसी भी निर्माण स्थल का गंदा पानी सीधे या नालियों के माध्यम से गौरी तालाब में गिरता हुआ पाया जाता है, तो उसकी निकासी को तुरंत बंद कराया जाएगा। तालाब को प्रदूषित होने से बचाने के लिए उन तमाम नालों को भी चिन्हित किया जा रहा है जिनका गंदा पानी इस मुख्य जल स्त्रोत में समा रहा है।
नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी वीरेंद्र चक्रवर्ती ने जानकारी देते हुए बताया कि एनजीटी के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जा रहा है। नए दिशानिर्देशों के तहत सर्वे का काम पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि 50 मीटर के दायरे में कुल कितने भवन आ रहे हैं और उन पर नियमानुसार क्या कदम उठाए जाने हैं। फिलहाल पूरा जोर तालाब में गिरने वाले दूषित पानी के रास्तों को स्थाई रूप से रोकने पर है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!