भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ समापन

भिंड में जैन धर्म के दशलक्षण पर्व का समापन धार्मिक अनुष्ठानों और उत्साह के साथ हुआ। इस अवसर पर शहर में धर्म पताकाएं लहराईं और भक्ति गीतों की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। शाम करीब सवा पांच बजे किला गेट क्षेत्र से श्रीजी की भव्य शोभायात्रा आरंभ हुई।

रथ और बग्गियों पर सजे नजर आए श्रद्धालु

शोभायात्रा के दौरान सफेद वस्त्रों में सुसज्जित श्रद्धालु रथ पर विराजमान श्रीजी को लेकर आगे बढ़ रहे थे। इसके अलावा घोड़ा गाड़ियों और बग्गियों में इंद्र-इंद्राणी के स्वरूप में सजे श्रद्धालु मार्ग में विशेष आकर्षण का केंद्र बने रहे। युवा वर्ग भक्ति भजनों पर नृत्य करते हुए अनुशासनबद्ध तरीके से चल रहा था।

शहर के मुख्य मार्गों से गुजरी यात्रा

यह शोभायात्रा किला गेट से शुरू होकर हनुमान बजरिया, गोल मार्केट, सदर बाजार, परेड चौराहा और अस्पताल चौराहा जैसे प्रमुख मार्गों से होती हुई कीर्ति स्तंभ तक पहुंची। मार्ग में जगह-जगह समाज के लोगों ने यात्रा का स्वागत किया।

मुनि विनय सागर महाराज ने दिया संदेश

कीर्ति स्तंभ पहुंचने पर मुनि विनय सागर महाराज और आर्यिका विजिज्ञासा ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने धर्म और जीवन में क्षमा के वास्तविक महत्व पर प्रकाश डाला, जिसे सुनकर सभी ने आत्मसात करने का संकल्प लिया।

संतों के प्रवचन के पश्चात जैन समाज के लोगों ने वर्षभर में हुई अनजाने की भूलों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी। सभी ने आपस में 'उत्तम क्षमा' कहकर अपने मन के द्वेष भुलाए और आपसी सौहार्द का संदेश दिया।