भिंड जिले में सामने आए बहुचर्चित नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता मिश्रा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस ने उस वाहन को जब्त कर लिया है जिसका इस्तेमाल अपराध को अंजाम देने के लिए किया गया था। मुख्य आरोपी सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव ने ग्वालियर से इस गाड़ी को एक एडमिशन एजेंट दीपक बादल के जरिए मंगवाया था, जो कॉलेज में छात्रों के प्रवेश का काम देखता था।

पचनदा पुल पर कराया गया क्राइम रीक्रिएशन

हत्याकांड की कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की और इसके बाद उसे पचनदा ले जाया गया। वहां यमुना नदी के पुल पर ले जाकर उस पूरी घटना का दोबारा मंचन कराया गया जिसके तहत मृतका के शव को नीचे फेंका गया था। जांच अधिकारियों के अनुसार इस गाड़ी के वैज्ञानिक परीक्षण के लिए एफएसएल टीम और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है, ताकि अदालत में पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।

कमीशन के लेन-देन और रंजिश का खुलासा

पुलिस पूछताछ में यह बात सामने आई है कि सत्यप्रकाश जामना रोड स्थित मां गायत्री देवी कॉलेज के प्रबंधन का कार्य संभालता था। बिहार के छात्रों के एडमिशन कराने वाले दीपक बादल के साथ उसका कमीशन के लेन-देन को लेकर गहरा संपर्क था। आरोपी अपनी जरूरत के हिसाब से दीपक से गाड़ियां मांगता रहता था, और इस बार एमपी 07 जेडवाई 0159 नंबर की कार का इस्तेमाल इस खौफनाक वारदात के लिए किया गया।

आरोपी ने पूछताछ में यह भी स्वीकार किया कि वह स्नेहलता को अपने रास्ते से हटाकर बच्चे को अपने पास रखना चाहता था, जबकि मृतका इसके लिए तैयार नहीं थी। इस साजिश में एम्बुलेंस चालक राजवीर खन्ना और गोलू जाटव ने भी उसका साथ दिया। कानपुर जाने का झांसा देकर महिला को वाहन में बिठाया गया और रास्ते में गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई।

शव की तलाश के लिए बुलाई जा सकती है विशेष टीम

थाना प्रभारी अनीता गुर्जर ने जानकारी दी कि वारदात के बाद आरोपियों ने रात करीब तीन बजे पचनदा क्षेत्र में यमुना नदी के पुल से शव को नीचे फेंक दिया था। आरोपी ने अपना मोबाइल फोन भी नदी में ही प्रवाहित कर दिया था। घटना के आठ दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक शव बरामद नहीं हो सका है, जिसके लिए भोपाल से विशेष गोताखोर टीम बुलाए जाने की प्रक्रिया चल रही है ताकि नदी में गहन तलाशी अभियान चलाया जा सके।