अभावों के बावजूद पिता ने बेटे को पढ़ाया

लहार तहसील के रावतपुरा खुर्द गांव निवासी सत्येंद्र कुमार तिवारी के बेटे पवन कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया है। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी, लेकिन बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर उसे इंदौर कोचिंग के लिए भेजा था। पवन ने एमपीपीएससी सहायक प्राध्यापक समाजशास्त्र परीक्षा-2024 में पूरे प्रदेश में सातवीं रैंक प्राप्त की है, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) में उनका पहला स्थान रहा है।

स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक का सफर

पवन की शुरुआती शिक्षा लहार के ही एक सरकारी स्कूल में पूरी हुई। इसके बाद उन्होंने लहार के शासकीय महाविद्यालय से बीएससी की डिग्री ली और आगे की पढ़ाई के लिए ग्वालियर आ गए। ग्वालियर के डॉ. भगवत सहाय शासकीय महाविद्यालय से समाजशास्त्र विषय में एमए करने के बाद उन्होंने प्रशासनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की राह पकड़ी। साल 2019 से उन्होंने पूरी शिद्दत के साथ एमपीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी।

असफलताओं और कानूनी पेचीदगियों को दी मात

तैयारी के दौरान पवन को कई बाधाओं का सामना करना पड़ा। वर्ष 2020 में उन्होंने पहली बार एमपीपीएससी परीक्षा दी और साक्षात्कार तक पहुंचे, लेकिन आरक्षण और फॉर्मूले से जुड़े विवाद के कारण परिणाम अटक गया। इसके बाद वर्ष 2021 और 2022 की मुख्य परीक्षाओं में भी उन्हें निराशा हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी लगातार जारी रखी।

चेन्नई में नौकरी के साथ जारी रखी पढ़ाई

कड़ी मेहनत के बल पर पवन ने यूजीसी-नेट परीक्षा पास की और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में उनका चयन चेन्नई में हो गया। सुबह नौ से शाम छह बजे तक नौकरी करने के बाद वे खुद अपने हाथ से खाना बनाते और रात को पढ़ाई में जुट जाते थे। कई बार वे भोर तक यानी रात के तीन-चार बजे तक पढ़ाई करते और कुछ घंटे सोकर फिर ड्यूटी पर चले जाते थे।

अपनी इस जिद्दी मेहनत और अटूट लगन के बल पर आखिरकार पवन ने उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर अपनी जगह सुनिश्चित कर ली। उनकी इस सफलता से उनके परिवार के साथ-साथ पूरे ग्रामीण इलाके और गवालियर-चंबल अंचल में खुशी का माहौल है।