भिंड जिले में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026 के अंतर्गत पटवारियों को निष्पादक बनाए जाने के मामले को लेकर विरोध तेज हो गया है। इसी सिलसिले में मंगलवार को दो सौ से अधिक पटवारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी नाराजगी जताई।
कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपा
पटवारी संघ के अध्यक्ष विनायक तोमर के नेतृत्व में जुटे पटवारियों ने लगभग एक घंटे तक प्रदर्शन और नारेबाजी की। इसके बाद प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस योजना के तहत थोपे जा रहे व्यक्तिगत दायित्वों से मुक्ति दिलाने की मांग की गई।
व्यक्तिगत नाम और ई-सिग्नेचर पर आपत्ति
संघ के अध्यक्ष विनायक तोमर ने स्पष्ट किया कि पटवारियों ने स्वामित्व योजना के तहत सर्वेक्षण, मानचित्रण और अभिलेखीय कार्यों में पूरा सहयोग किया है। ग्रामीण आबादी का यह सर्वेक्षण पंचायत राज व्यवस्था के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ है, इसलिए योजना का मूल निष्पादन और प्रशासनिक कार्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से ही कराया जाना चाहिए।
ज्ञापन में मुख्य रूप से यह बात उठाई गई कि पंजीयन विलेख में पटवारी का व्यक्तिगत नाम, पद और ई-सिग्नेचर दर्ज होने से भविष्य में सीमा, क्षेत्रफल, नाम, वारिसान, हिस्सेदारी, कब्जा या पूर्व सर्वेक्षण में किसी भी प्रकार की त्रुटि पाए जाने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
फार्मर आईडी और जियो टैग गिरदावरी का विरोध
प्रदर्शन के दौरान पटवारियों ने फार्मर आईडी बनाने के काम में बनाए जा रहे दबाव और उसके तहत की जा रही कार्रवाई को रोकने की मांग की। संघ का कहना है कि कम समय में बड़ी संख्या में आईडी बनाकर शासन की योजना को सफल बनाया गया है, और शेष कार्य तकनीकी समस्याओं के समाधान के साथ किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही जियो टैग गिरदावरी को पूरी तरह अव्यवहारिक बताते हुए इसे बंद करने की मांग की गई है। संघ ने दो टूक कहा है कि जब तक यह जियो टैग व्यवस्था हटाई नहीं जाती, तब तक पटवारी गिरदावरी का कार्य नहीं करेंगे। इसके अलावा वेतन विसंगति, ग्रेड-पे, कैडर रिव्यू और पदोन्नति जैसी पुरानी मांगें भी उठाई गईं।
कदमबंद आंदोलन की चेतावनी
पंजीयन दस्तावेज में पटवारी के नाम की जगह मध्यप्रदेश सरकार अंकित की जाए और व्यक्तिगत दायित्व वाले कार्यों से अलग रखा जाए। यदि दबाव बढ़ाया गया तो प्रदेश के पटवारी कलमबंद आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
पटवारी संघ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर गौर नहीं किया गया और दबाव की कार्रवाई जारी रही, तो पूरे प्रदेश के पटवारी काम छोड़कर आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!