लहार नगर के बरहा रोड पर पचपेड़ा तिराहा से राधेश्याम गार्डन तक रहने वाले लोग पिछले तीन साल से गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। आरोप है कि विकास कार्यों में तकनीकी लापरवाही और नगर परिषद की अनदेखी के कारण स्थानीयनिवासी हर बारिश में मुसीबत झेलने को मजबूर हैं। इलाके के लोगों का जीवन सड़क निर्माण की खामियों के चलते अस्त-व्यस्त हो गया है।
ऊंची सड़क और अधूरा नाला बना जी का जंजाल
करीબ तीन साल पहले नगर परिषद द्वारा इस सड़क के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया गया था। स्वीकृत योजना के मुताबिक सड़क के दोनों किनारों पर कंक्रीट का पक्का नाला बनाया जाना था। ठेकेदार ने सड़क तो बना दी लेकिन उसकी ऊंचाई आसपास बने मकानों के तल से काफी अधिक कर दी गई। इसके विपरीत, जल निकासी के लिए बेहद जरूरी नाले का निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया।
सड़क के अत्यधिक ऊंचे होने और नाला न होने की वजह से बारिश का सारा पानी सीधे निचले इलाकों में बने घरों में भर जाता है। बरसात के दौरान घरों के कमरों, रसोई और आंगनों में पानी घुसने से लोगों का फर्नीचर, बिस्तर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जरूरी कागजात खराब हो चुके हैं। रात के वक्त तेज बारिश होने पर स्थानीय परिवारों को पानी निकालने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ती है।
बाउंड्रीवॉल तोड़ी पर नहीं बना नाला
स्थानीय लोगों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि निर्माण कार्य के आखिरी चरण में नाले का काम शुरू करने के नाम पर कई घरों की बाउंड्रीवॉल तोड़ दी गई थी। इससे लोगों को अपनी संपत्ति का भी नुकसान झेलना पड़ा। रहवासियों में इस बात का गहरा आक्रोश है कि जब नाला बनाया ही नहीं जाना था, तो बिना वजह लोगों की दीवारें क्यों तोड़ी गईं।
बरसात के दिनों में जलभराव के अलावा लोगों के सामने जहरीले जीवों का भी बड़ा खतरा मंडराता रहता है। पानी के साथ सांप और बिच्छू जैसी खतरनाक प्रजाति के जीव सीधे घरों के अंदर तक पहुंच जाते हैं, जिससे हर समय अनहोनी का डर बना रहता है।
नगर परिषद अध्यक्ष का बयान
बरहा रोड पर पक्के नाले का निर्माण कराया जाना है। इस संबंध में जल्द ही नगर परिषद के इंजीनियरों से चर्चा की जाएगी, ताकि लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए नाले का काम जल्द से जल्द शुरू करवाया जा सके। - मिथलेश देवी, अध्यक्ष, नगर परिषद लहार






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!