भिंड जिले में स्वामित्व अधिकार अभिलेख के निष्पादन और पंजीयन प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। मध्यप्रदेश पटवारी संघ के बैनर तले स्थानीय पटवारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई।
व्यक्तिगत जवाबदेही तय होने की जताई आशंका
संघ के पदाधिकारियों ने इस दौरान स्पष्ट किया कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार किए जा रहे अधिकार अभिलेख के निष्पादन कार्य में पटवारियों को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। इस प्रक्रिया में नाम, पहचान और अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। संघ का तर्क है कि भविष्य में किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न होने पर व्यक्तिगत स्तर पर पटवारी की जवाबदेही तय होने का खतरा बना रहता है, जिसके चलते इस पूरी प्रक्रिया में बदलाव किया जाना आवश्यक है।
पंचायत स्तर पर पहचान सत्यापन की उठी मांग
पटवारी संघ ने एसओपी में हितग्राहियों की पहचान के सत्यापन की जिम्मेदारी पटवारियों को सौंपे जाने पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। संघ का कहना है कि ग्राम आबादी क्षेत्र में निवास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान से पटवारियों का सीधा संपर्क नहीं होता है। इसे ध्यान में रखते हुए संघ ने पहचान सत्यापन का कार्य ग्राम पंचायत स्तर पर कराने का सुझाव दिया है और यह जिम्मेदारी सरपंच तथा सचिव को सौंपने की मांग की है।
ज्ञापन सौंपकर नियमों में स्पष्टता की मांग
जिला पटवारी संघ के अध्यक्ष विनायक तोमर ने बताया कि एसओपी के कई प्रावधानों में स्पष्टता होना बेहद जरूरी है। नाम और पहचान से जुड़े मामलों में यदि विरोधाभासी स्थिति बनती है, तो कार्य करने वाले कर्मचारी के समक्ष गंभीर व्यावहारिक और कानूनी संकट खड़ा हो सकता है। संघ ने मांग की है कि पटवारियों को निष्पादक की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए और यह कार्य किसी सक्षम अधिकारी या संबंधित विभाग को सौंपा जाए। प्रदर्शन के अंत में मुख्यमंत्री के नाम एडीएम लक्ष्मीकांत पांडे को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें बड़ी संख्या में पटवारी उपस्थित रहे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!