भिंड जिले के वन विभाग में तैनात SDO रामकुमार पर पांच संतानों की जानकारी सरकारी सेवा रिकॉर्ड से कथित तौर पर छिपाने का गंभीर मामला सामने आया है। इस संबंध में औपचारिक शिकायत मिलने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भिंड डीएफओ सिरसाम ने ग्वालियर-चंबल के मुख्य वन संरक्षक (CCF) लवित भारती को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की जांच किसी अन्य वन मंडल के अधिकारी से कराने का अनुरोध किया है।

सेवा रिकॉर्ड और परिवार आईडी में बच्चों की संख्या को लेकर आमने-सामने के दावे

शिकायतकर्ता अनिल कुमार ने SDO रामकुमार के खिलाफ की गई शिकायत में दावा किया है कि उन्होंने नौकरी ज्वाइन करते समय अपने सेवा रिकॉर्ड में केवल एक संतान, शिवांगी अरोलिया, का ही जिक्र किया था। इसके विपरीत, उपलब्ध परिवार आईडी में हिमांशी अरोलिया और वान्या अरोलिया के नाम भी दर्ज होने की बात कही गई है। इसके अलावा, शिकायत में दो अन्य संतानों का भी उल्लेख किया गया है, जिनकी शादियां हो चुकी हैं और जिनमें से एक का विवाह भिंड तथा दूसरी का मुरैना में होने का दावा किया गया है।

दस्तावेजों के मिलान से खुलेगी सच्चाई

शिकायतकर्ता का कहना है कि पांच संतानों के होने के बावजूद सरकारी दस्तावेजों में केवल एक संतान का दर्ज होना नियमों के विपरीत है और इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। डीएफओ सिरसाम के आग्रह पर अब दूसरे मंडल से जांच अधिकारी तय किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जांच के दौरान SDO की सेवा पुस्तिका, नियुक्ति के समय दिए गए आधिकारिक घोषणा-पत्र, परिवार आईडी और अन्य संबंधित शासकीय दस्तावेजों का बारीकी से मिलान किया जाएगा।

रेंजर विवाद और लकड़ी से भरे कंटेनर का मामला भी चर्चा में

SDO रामकुमार से जुड़े अन्य विवादों की भी चर्चा जोरों पर है। जनविश्वास शिविर के दौरान SDO और रेंजर कृतिका शुक्ला के बीच उपजे विवाद को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं। डीएफओ सिरसाम ने पुष्टि की है कि इस विवाद से जुड़ी जांच रिपोर्ट तैयार कर पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है।

इसके अतिरिक्त, 19 नवंबर 2025 को दबोह के अमाहा गांव से दतिया ले जाए जा रहे लकड़ी से भरे एक कंटेनर को इंदरगढ़ में राजस्व टीम द्वारा पकड़े जाने का मामला भी उठाया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंटेनर पकड़े जाने के करीब दो घंटे बाद भिंड से ट्रांजिट पास (TP) जारी किया गया था, जिसमें तत्कालीन SDO और विभागीय कर्मचारी धीरज पांडेय की भूमिका को संदेहास्पद बताते हुए जांच के निर्देश दिए गए थे।