भिंड जिले के आलमपुर नगर में जनता को घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई जलावर्धन योजना इन दिनों गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही है। बिजली कंपनी द्वारा भारी-भरकम बकाया राशि के चलते फिल्टर प्लांट की बिजली काट दी गई है, जिससे पूरे इलाके में पानी की सप्लाई चरमरा गई है।
करीब 84 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फिल्टर प्लांट का लगभग 84 लाख रुपए का बिजली बिल लंबे समय से जमा नहीं किया गया था। बिल का भुगतान न होने के कारण बिजली वितरण कंपनी ने यह कठोर कदम उठाते हुए प्लांट का कनेक्शन काट दिया। नतीजतन, बीती 29 अगस्त से फिल्टर प्लांट पूरी तरह बंद पड़ा है और इससे जुड़ी पानी की सप्लाई ठप हो गई है।
35 दिन से 15 वार्डों के लोग जूझ रहे हैं पेयजल समस्या से
फिल्टर प्लांट बंद होने के कारण नगर के 15 वार्डों के निवासियों को पिछले करीब 35 दिनों से नियमित जलापूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थानीय नागरिकों वीरेंद्र सिंह और राकेश शर्मा ने बताया कि नगर परिषद फिलहाल वैकल्पिक तौर पर पुरानी पाइपलाइन के जरिए पानी देने का प्रयास कर रही है, लेकिन बिजली कटते ही वह व्यवस्था भी ठप हो जाती है।
पानी की इस किल्लत के चलते आम जनता को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मजबूरन सार्वजनिक हैंडपंपों का सहारा लेना पड़ रहा है। गर्मी और उमस के इस दौर में पानी के लिए भटकना लोगों की सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है।
करोड़ों की लागत से शुरू हुई थी जलावर्धन योजना
गौरतलब है कि आलमपुर में पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए शासन स्तर पर लगभग 29 करोड़ रुपए की लागत से जलावर्धन योजना को अमलीजामा पहनाया गया था। इस योजना के तहत नगर में 29 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड पाइपलाइन बिछाने के साथ ही 1,727 घरेलू नल कनेक्शन बांटे गए थे।
जल भंडारण के लिए साढ़े तीन-साढ़े तीन लाख लीटर क्षमता की दो विशाल टंकियों का निर्माण भी किया गया था। नगर से लगभग 25 किलोमीटर दूर ग्राम मिलक बसई में यह फिल्टर प्लांट स्थापित किया गया है, जहां से पानी को शुद्ध कर शहर तक पहुंचाया जाना था, लेकिन बिजली बिल के भुगतान में हुई चूक ने इस पूरी योजना के संचालन पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!