भिंड जिले के कृषि अंचल में इन दिनों अवैध और नकली उर्वरक का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, जिस पर लगाम कसने के लिए कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जिले में बिना लाइसेंस के खाद बेचने और अमानक उर्वरक की सप्लाई के दो अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है, जिसमें विभाग की शिकायत पर कुल सात लोगों के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
सकराया गांव में बिना लाइसेंस के उतारी जा रही थी 600 बोरी खाद
कृषि विभाग के अनुसार, गत 28 सितंबर को एक सूचना के आधार पर निरीक्षण दल ने सकराया गांव में छापा मारा था। यहां एक मकान पर ट्रक (एमपी 07 एचबी 8077) के जरिए 600 बोरी एपीएस खाद उतारी जा रही थी। ट्रक चालक हैदर अली ने पूछताछ में बताया कि यह खेप विशेष रूप से मंदसौर से मंगाई गई थी। जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि यह खाद जवाहर लाल शर्मा के पते पर पहुंचनी थी, लेकिन भिंड जिले में उनके नाम से उर्वरक का कोई वैध लाइसेंस पंजीकृत नहीं पाया गया।
इस मामले में अनधिकृत रूप से खाद का भंडारण और परिवहन करने पर जवाहर लाल शर्मा, सचिन दीक्षित, विजय बैरागी और नितिन छावड़ा के खिलाफ फूप थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया है।
भारौली खुर्द में इफको की पैकिंग में मिली नकली डीएपी
दूसरा मामला भारौली खुर्द गांव से जुड़ा है, जहां 8 अक्टूबर को विभाग को मिली गोपनीय सूचना के बाद औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान प्रतिष्ठित इफको कंपनी की पैकिंग में 127 बोरी संदिग्ध और नकली डीएपी खाद बरामद हुई। स्थानीय किसान रमेश सिंह राजावत ने बताया कि जितेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ट्रैक्टर (एमपी 30 जेजी 6728) में करीब 200 बोरी डीएपी भरकर अमायन कृषि उपज मंडी के पास खड़ा था और वहीं से किसानों को खाद बांटी जा रही थी।
कृषि विभाग ने इस कार्रवाई के दौरान मौके के वीडियो, फोटोग्राफ और प्रयोगशाला परीक्षण रिपोर्ट से जुड़े सभी साक्ष्य पुलिस को सौंप दिए। इसके आधार पर पुलिस ने जितेंद्र सिंह, राघवेंद्र बघेल और महादेव बघेल के खिलाफ भारौली थाने में धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
खाद के असली सप्लायर का नाम छिपा रहे हैं आरोपी विक्रेता
कार्रवाई के दौरान पकड़े गए विक्रेताओं और बिचौलियों से जब इस बात की पूछताछ की गई कि मंदसौर से इतनी बड़ी मात्रा में खाद की सप्लाई उन्हें कौन कर रहा था, तो वे संतोषजनक जवाब देने से बचते नजर आए। आरोपी फिलहाल सप्लायर का नाम और उसका नेटवर्क उजागर करने को तैयार नहीं हैं।
फिलहाल कृषि विभाग और पुलिस मिलकर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क के तार मंदसौर से लेकर भिंड तक कहां-कहां जुड़े हुए हैं। किसानों को इस रबी सीजन में गुणवत्तापूर्ण उर्वरक मिल सके, इसके लिए स्थानीय प्रशासन अंचलभर में खाद विक्रेताओं के स्टॉक और लाइसेंस की औचक जांच तेज कर रहा है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!