भिंड जिले के ग्रामीण इलाकों में क्वारी नदी की बाढ़ का कहर थमने के बाद अब भारी नुकसान की तस्वीरें सामने आ रही हैं। नदी का जलस्तर कम होने के बाद मिरचोली और जवासा गांवों के खेतों में सड़ी हुई फसलें और कीचड़ की मोटी परतें दिखाई दे रही हैं, जिससे अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
आठ दिनों तक टापू बने रहे गांव, आवागमन रहा ठप
जिला मुख्यालय के करीब स्थित मिरचोली गांव में क्वारी नदी का पानी लगभग आठ दिनों तक जमा रहा। इस दौरान गांव के मुख्य रास्ते पूरी तरह बंद हो गए और इलाका टापू में तब्दील हो गया। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरी चीजों और इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। पानी के भारी फैलाव के कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त रहा।
500 बीघा से अधिक कृषि भूमि पर फसलों का नुकसान
मिरचोली के करीब 150 परिवारों की 500 बीघा से ज्यादा कृषि भूमि बाढ़ की चपेट में आ गई। किसानों के खेतों में ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग और अरहर की फसलें खड़ी थीं, जो लंबे समय तक पानी में डूबे रहने के कारण पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। कई किसानों ने कर्ज लेकर खाद और बीज की व्यवस्था की थी, लेकिन फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक कमर टूट गई है।
जवासा गांव में भी हालात कमोबेश ऐसे ही हैं। यहां न सिर्फ खेत डूबे बल्कि पानी घरों तक पहुंच गया, जिससे घरेलू सामान और गृहस्थी का अन्य सामान भी खराब हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले चार-पांच सालों से हर बारिश के सीजन में क्वारी नदी इसी प्रकार उफनती है और उनके खेतों व घरों को नुकसान पहुंचाती है।
सड़ती फसलों की दुर्गंध से बीमारी फैलने का अंदेशा
पानी उतरने के बाद अब खेतों से उठने वाली तीव्र दुर्गंध हवा के जरिए गांवों तक पहुंचने लगी है। जगह-जगह पानी के जमा रहने और फसल के गलने के कारण ग्रामीण अब संक्रमण और बीमारियों के फैलने को लेकर चिंतित हैं। किसानों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द इस नुकसान का आकलन करे ताकि उन्हें उचित राहत मिल सके।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!