भिंड जिले में मात्र 40 दिनों के भीतर निवेशकों की रकम दोगुनी करने का दावा करने वाली ऑरोरा एक्स कंपनी का असली सच अब उजागर हो चुका है। इस ऑनलाइन ठगी के जाल में फंसकर हजारों निवेशकों के करोड़ों रुपए डूबने की आशंका जताई जा रही है। कंपनी के ऑफिशियल ट्रेडिंग ऐप पर अब निवेशकों की जमा पूंजी माइनस में प्रदर्शित होने लगी है, जिससे स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है।

एआई ट्रेडिंग के नाम पर दिया गया था झांसा

यह कंपनी निवेशकों को यह कहकर अपने जाल में फंसाती थी कि उनका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमैटिक है। यह सिस्टम शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को खुद समझकर शेयरों की खरीद-फरोख्त करता है और मुनाफा कमाता है। इस लुभावने वादे और कम समय में पैसा डबल होने के लालच में आकर जिले के तमाम लोगों ने इसमें अपनी गाढ़ी कमाई झोंक दी थी।

पहले सिस्टम अपग्रेड का बहाना, फिर साइबर हमले का नाटक

पिछले 10 दिनों से निवेशक लगातार अपनी जमा राशि निकालने के लिए संघर्ष कर रहे थे। शुरुआत में कंपनी के नुमाइंदों ने सिस्टम अपग्रेड होने की बात कहकर लोगों को टाला और जल्द ही निकासी शुरू होने का भरोसा दिलाया। लेकिन हाल ही में ऐप पर एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया जिसमें साइबर हमले का हवाला देते हुए ट्रेडिंग में भारी नुकसान होना बताया गया। इसके तुरंत बाद ही निवेशकों का अकाउंट बैलेंस माइनस में दिखने लगा।

कंपनी की ओर से यह तर्क दिया गया है कि एआई ट्रेडिंग के दौरान विदेशी कंपनियों के शेयरों में बड़ा नुकसान हुआ है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि किन शेयरों में पैसा लगाया गया था, वास्तविक घाटा कितना था या इस दावे में कितनी सच्चाई है। बिना किसी स्पष्ट तकनीकी प्रमाण के ऐप पर रकम माइनस हो जाने से निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं।

पुलिस की जांच जारी, एफआईआर का इंतजार

इस पूरे मामले में ऑरोरा एक्स के संचालकों के खिलाफ अभी तक औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। पुलिस स्तर पर शुरुआती पत्राचार और मामले की पड़ताल की जा रही है। ठगी के शिकार हुए लोग जल्द से जल्द कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी डूबी हुई पूंजी को वापस लाने के रास्ते बन सकें।