भिंड जिले में स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री कार्य को लेकर स्थानीय प्रशासन और पटवारियों के बीच गतिरोध लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कड़े कदम उठाए जाते हुए शुक्रवार को 15 और पटवारियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिए गए हैं।
दो दिनों में 38 पटवारियों पर हुई कार्रवाई
इससे पहले गुरुवार को 23 पटवारियों को नोटिस दिए गए थे तथा इसी क्रम में 14 पटवारियों को निलंबित भी किया जा चुका है। इस प्रकार महज दो दिनों के भीतर जिले में कुल 38 पटवारियों को प्रशासनिक नोटिस मिल चुके हैं, जिससे मैदानी अमले में हड़कंप मच गया है।
पटवारियों और प्रशासन के बीच यह विवाद पिछले करीब एक महीने से चल रहा है। पटवारियों की मुख्य मांग यह है कि संपत्तियों की रजिस्ट्री में उनके नाम के बजाय सीधे तौर पर मध्य प्रदेश शासन का नाम दर्ज किया जाए। जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, तब तक उन्होंने योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री करने से साफ इंकार किया हुआ है।
लहार, भिंड और मेहगांव में बढ़ा तनाव
शासन स्तर पर बातचीत विफल होने के बाद भिंड जिले में प्रशासन ने सख्ती और बढ़ा दी है। ताजा कार्रवाई के तहत शुक्रवार को लहार में 7, भिंड मुख्यालय पर 3 और मेहगांव में 5 पटवारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। इससे पहले पटवारियों ने 8 अक्टूबर से अपनी कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी थी।
इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए अपर कलेक्टर राजन बी. नाडिया ने बताया कि स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है और तय नियमों के तहत ही आगे की कार्रवाई की जा रही है।
कलेक्ट्रेट परिसर में दिया धरना और सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष विनायक सिंह तोमर के नेतृत्व में तमाम पटवारी शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में धरने पर बैठे रहे। उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि उनकी मांगें पूरी होने तक यह आंदोलन इसी प्रकार जारी रहेगा।
संघ की ओर से यह कड़ी चेतावनी भी दी गई है कि यदि प्रशासन की ओर से दंडात्मक कार्रवाई का सिलसिला ऐसे ही जारी रहा, तो जिलेभर के सभी पटवारी अपने पदों से सामूहिक इस्तीफा देने का बड़ा कदम उठाने के लिए बाध्य हो जाएंगे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!