भिंड जिले के फूप नगर परिषद क्षेत्र में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं और फर्जी भुगतानों के मामलों की जांच का दायरा अब व्यापक हो गया है। स्थानीय स्तर पर यह शिकायत की गई थी कि जिन निर्माण कार्यों को मैदानी स्तर पर अंजाम ही नहीं दिया गया, उनकी ऑफलाइन फाइलें तैयार कर भारी-भरकम राशि आहरित कर ली गई है। इसके अलावा विभिन्न मदों के नाम पर जाली वाउचर तैयार करके भी खातों में पैसों के लेन-देन का अंदेशा जताया गया था।

कलेक्टर और संयुक्त संचालक तक पहुंची थी शिकायत

इस पूरे प्रकरण की प्रारंभिक शिकायत कुछ वक्त पहले जिला कलेक्टर के साथ-साथ नगरीय प्रशासन विभाग के संयुक्त संचालक के समक्ष दर्ज कराई गई थी। शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जिम्मेदारी डूडा के प्रभारी अधिकारी एवं लहार के एसडीएम प्रदीप मिश्रा को सौंपी गई थी। इसी सिलसिले में वे सोमवार की दोपहर लगभग ढाई बजे औचक निरीक्षण के लिए फूप नगर परिषद कार्यालय पहुंचे।

300 फाइलों का रिकॉर्ड जब्त, सीएमओ और कर्मचारी मिले नदारद

जांच अधिकारी के कार्यालय पहुंचने के दौरान वहां के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) अनुपस्थित मिले। एसडीएम मिश्रा ने लेखा शाखा का रुख करते हुए पिछले कुछ वर्षों के दौरान किए गए ऑफलाइन भुगतानों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया। इस दौरान लगभग 300 फाइलें खंगाली गईं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण फाइलों की फोटोकॉपी और शेष का रिकॉर्ड डिजिटल फॉर्मेट (पीडीएफ) में सुरक्षित कर लिया गया। शाम करीब साढ़े पांच बजे तक चली इस कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को कई संदिग्ध वाउचर भी हाथ लगे हैं।

निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक सख्ती का सामना करते हुए कार्यालय की कार्यप्रणाली की पोल भी खुली। एसडीएम प्रदीप मिश्रा ने जब नगर परिषद के स्टाफ की उपस्थिति जांची, तो अधिकांश कर्मचारी अपनी ड्यूटियों से गैरहाजिर पाए गए। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने अनुपस्थित मिले कर्मियों की गैरहाजिरी दर्ज कर दी।

फूप नगर परिषद में भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत आई थी, जिसकी जांच की जा रही है। फाइलों की डिटेल ले ली है। - प्रदीप मिश्रा, प्रभारी अधिकारी डूडा एवं एसडीएम लहार